मानसून के दाखिल होने के चौथे दिन राजधानी रायपुर सहित मध्य छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में रविवार को बारिश की एक बूंद नहीं पड़ी। दिनभर उमस और गर्मी ने लोगों को बेचैन रखा। हालांकि मौसम विभाग ने रविवार-सोमवार को बारिश के आसार जताए हैं, लेकिन लोगों में चर्चा शुरू हो गई है कि मानसून की शुरुआत में ही बारिश क्यों थम गई है और कम शुरू होगी? दक्षिण-पश्चिम मानसून 11 जून को बस्तर पहुंचने के बाद अगले ही दिन रायपुर पहुंच गया।
पहले दिन ठीकठाक बारिश हुई, दूसरे दिन भी बौछारें पड़ीं लेकिन उसके बाद से बारिश वाले बादल गायब हैं। रविवार को दिनभर मौसम साफ रहा। शुक्रवार-शनिवार को राजधानी में जो बारिश हुई, उससे जमीन पूरी तरह गीली नहीं हुई। इसलिए थोड़ी सी धूप निकलते ही उमस बढ़ने लगी। रविवार को दिनभर मौसम साफ रहा। दिन का तापमान भी 36 डिग्री के करीब पहुंच गया। हवा में नमी सुबह 82 फीसदी थी। शाम को यह 60 फीसदी से अधिक बनी रही। इस वजह से गर्मी और उमस ने लोगों को बेचैन किया।
लालपुर मौसम केंद्र के मौसम विज्ञानी एचपी चंद्रा ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में सक्रिय हो गया है।इन हवाओं को नमी लेकर आगे बढ़ने के लिए आसपास कुछ मजबूत सिस्टम होना चाहिए। अभी राजस्थान से मध्यप्रदेश और उत्तरी छत्तीसगढ़ होते हुए ओडिशा तक द्रोणिका बनी हुई है। इसके कारण उत्तरी छत्तीसगढ़ में बारिश के लिए अनुकूल हैं। इस वजह से मानसून के सक्रिय होने के साथ उत्तरी छत्तीसगढ़ में जमकर बारिश हो रही है।
भारी बारिश के हालात अलग
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि मानसून के दौरान देश के ज्यादातर राज्यों या राज्य को ज्यादातर हिस्सों में समान बारिश के लिए कई परिस्थितियां जिम्मेदार होती हैं। मानसून का आना एक तरह से हवा की दिशा बदलना है। गर्मी में हवा की दिशा पश्चिमी रहती है। इस ओर से मरुस्थली हवा पूरे देश को प्रभावित करती है। मानसून का आना यानी हवा की दिशा बदलकर दक्षिण-पश्चिम हो जाना है। इस तरफ की हवा अपने साथ समुद्र से नमी लेकर आती है।
बंगाल की खाड़ी में जब मजबूत सिस्टम यानी कम दबाव का क्षेत्र, अवदाब इत्यादि बनते हैं तो वह समुद्र की नमीयुक्त हवा को आगे की ओर बढ़ाता है। इसी समय उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ और अन्य सिस्टम इन हवा को मजबूती के साथ अपनी ओर खींचते हैं। मध्य भारत में कहीं-कहीं पर चक्रवात तथा कुछ अन्य सिस्टम भी बनते हैं। तब समुद्री हवा बड़ी मजबूती और तेजी के साथ एक समान रूप से सक्रिय होती है और बारिश होती है। मानसून आने के बाद छत्तीसगढ़ में आमतौर पर 25-30 जून तक ऐसी ही स्थिति रहती है। अच्छी बारिश जुलाई और अगस्त में होती है। राज्य में औसतन 1150 मिमी बारिश में से 700 तो इन्हीं दो महीने में होती अाई है।
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