कोरोना संक्रमण को देखते रिजर्व बैंक ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से कर्ज लेने वाले किसानों को राहत देते हुए उन्हें 31 अगस्त तक कर्ज पटाने की मोहलत दी है। लेकिन जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारी सालों से चले आ रहे नियम के तहत बिना कर्ज पटाए कर्ज नहीं देने के नियम पर अड़े हुए हैं।
बैंक के इस नियम के चलते 10 हजार 164 किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि जब रिजर्व बैंक ने किसानों को कोरोना संक्रमणकाल में राहत देते हुए कर्ज पटाने की मोहलत दी है तो जिला सहकारी केंद्रीय बैंक को जिन किसानों ने पिछले साल का कर्ज जमा नहीं कर पाए हैं उन्हें भी कर्ज देना चाहिए। लेकिन ऐसा बैंक नहीं कर रहा है।
जानकारी के मुताबिक बस्तर जिले में खरीफ सीजन में धान की खेती करने वाले करीब 60 फीसदी किसान समितियों और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से मिलने वाले नकदी और वस्तु के रूप में कर्ज लेकर खेती करते आ रहे हैं। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के विपणन अधिकारी आरबी सिंह ने कहा किसानों को कर्ज पटाने के लिए समय दिया गया है लेकिन बैंक कर्ज नहीं पटाने वाले किसानों को कोई राहत नहीं दे रहा है। पिछले साल जिन किसानों ने कर्ज लिया था वे जब तक पुराना बकाया जमा नहीं कर देते तब तक उन्हें कोई कर्ज नहीं दिया जाएगा। कर्ज जम करने की मियाद बढ़ाने के बाद किसान पुराना कर्ज जमा कर रहे हैं और इसके बाद इस साल खेती के लिए कर्ज ले रहे हैं।
225 करोड़ रुपए कर्ज ले चुके हैं संभाग के किसान
इधर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक और समितियों के माध्यम से बस्तर संभाग के 59 हजार 553 किसानों ने अब तक 225 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है । बिना ब्याज के मिलने वाले इस कर्ज को लेने के लिए किसान लगातार आगे आ रहे हैं । बैंक के अधिकारियों ने बताया कि इस साल करीब 400 करोड़ रुपए कर्ज देने का लक्ष्य रखा गया है । उम्मीद है कि बैंक के इस लक्ष्य का फायदा सवा लाख किसान लेंगे।
कर्ज जमा नहीं करने वाले किसानाें की संख्या अधिक
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से कर्ज लेकर उसे नहीं पटाने वाले किसानों में सबसे अधिक संख्या कांकेर किसानों की है। जानकारी के मुताबिक कांकेर में 4181, बस्तर 1704, कोंडागांव 2115, नारायणपुर 168, दंतेवाड़ा में 289 किसानों ने अब तक कर्ज नहीं पटाया है । इसके अलावा बीजापुर में 1020 और सुकमा के 679 किसान कर्ज पटाने के लिए आगे नहीं आए थे। बैंक के अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल 2018- 19 में बैंक और समितियों से कर्ज लेने वाले किसानों को यह कर्ज 31 मार्च तक पटा देना था जो वह नहीं कर सके।
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