इस हफ्ते साल का सबसे बड़ा दिन भी पड़ेगा और सदी का दूसरा सबसे लंबा सूर्यग्रहण भी। 21 जून इन 2 संयोगों को साथ लिए आ रहा है। इस दिन 6 ग्रह वक्री भी रहेंगे। ग्रहों की ऐसी स्थिति 100 साल में एक बार बनती है। ज्योतिषियों का दावा है कि इसके असर से भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में बड़े भूकंप आ सकते हैं। एक से डेढ़ महीने के भीतर कोरोना संक्रमण में कमी आने के दावे भी किए जा रहे हैं।
ज्योतिषियों का कहना है कि रविवार को मृगशिरा नक्षत्र में ग्रहण पड़ रहा है। मृगशिरा का स्वामी मंगल है और गोचर में मंगल अभी मीन राशि में बैठा हुआ है। इसका प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा। ग्रहण की प्रकृति कंकड़ाकृति होगी। इसमें सूर्य आग की अंगूठी के समान नजर आता है। भारत में यह ग्रहण सिर्फ हरियाणा और आसपास के इलाकों में ही नजर आएगा इसलिए भारत पर इसका शत प्रतिशत प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, देश के कुछ हिस्सों में ग्रहण की छाया पड़ेगी इसीलिए इसका प्रभाव भी पड़ेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दौरान 6 ग्रह वक्री अवस्था में होंगे। इन ग्रहों का वक्री होना और ग्रहण पड़ना, यह लगभग 100 साल बाद हो रहा है। जो-जो ग्रह वक्री हैं उनसे संबंधित राशि के जातक इससे प्रभावित होंगे।
ऐसे गुजरेगा ग्रहण
स्पर्श- सुबह 10.25
मध्य- दोपहर 12.11
मोक्ष- दोपहर 1.59
ग्रास मान- 0.9936
सूतक- एक दिन पहले यानी 20 जून की रात 10.25 बजे से शुरू हो जाएगा।
21 जून का दिन इन वजहों से भी खास
- साल के सबसे बड़े दिन पर सूर्य ग्रहण लग रहा है।
- सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर आएगा।
- इस दिन रविवार है। यह भगवान सूर्य को समर्पित दिन है।
- 9 में से 6 ग्रह वक्री रहेंगे। इसे उल्टी चाल कहा जाता है।
6 माह तक राशियों पर ऐसा असर
मेष -धन लाभ।
वृषभ -मातृ कष्ट।
मिथुन -हानि।
कर्क -लाभ।
सिंह - पारिवारिक लाभ।
कन्या - धन लाभ।
तुला - अपयश से बचें।
वृश्चिक कष्ट।
धनु - पत्नी संबंधी कष्ट
मकर - धन लाभ।
कुंभ - संतान लाभ।
मीन - लाभ।
"ग्रहण से पहले स्नान करें। तीर्थों पर न जा सकें तो घर में ही पानी में गंगाजल मिलाकर नहाएं। ग्रहण के दौरान भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। श्रद्धा के अनुसार दान भी करना चाहिए। ज्योतिषशास्त्र में सूर्य ग्रहण के दौरान लकड़ी काटना, फूल तोड़ना आदि की मनाही है।"
- डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे, ज्योतिषाचार्य
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