खरीफ फसलों को मवेशियों से बचाने के लिए प्रदेश के करीब 20 हजार गांवों में पहली बार रोका-छेका अभियान शुरु हो गया है। जो 30 जून तक चलेगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दुर्ग के ग्राम पतोरा में आयोजित रोका-छेका की रस्म में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। गांवों में चल रही रोका-छेका की रस्म के समय ग्रामीणों के लिए यह क्षण और भी खुशी में बदल गया जब पूजा के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉल के माध्यम से यहां के ग्रामीणों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने सरपंच से पूछा कि गायों की पूजा हो गई। आप लाेगों ने क्या संकल्प लिया। सरपंच अंजीता साहू ने मुख्यमंत्री को बताया कि हमने सभी से मवेशियों को गौठान में ही रखने की शपथ दिलवाई है। मुख्यमंत्री को गांव के वरिष्ठ जनप्रतिनिधि अश्विनी साहू ने बताया कि गौठान में भी खरीफ फसल के लिए मवेशियों को रखने के लिए आवश्यक तैयारियां कर ली गई है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर पहाटिया से भी बात की। उन्होंने कहा कि पहाटिया लोगों के अच्छे कार्य की वजह से ही गौठान आगे बढ़ रहा है। उन्होंने गांव वालों को खरीफ फसल की शुभकामनाएं भी दी।
2215 गौठानों के लिए 8.86 करोड़ रूपए जारी
इधर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने गौठान प्रबंधन समितियों को कुल आठ करोड़ 86 लाख रूपए की राशि जारी की है। इसमें से हर गौठान को 40 हजार रूपए दिए गए हैं। गौठान प्रबंधन समितियों के माध्यम से खुले में घूमने वाले मवेशियों के नियंत्रण और व्यवस्थापन में यह राशि खर्च की जाएगी। पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव के निर्देश पर विभाग के माध्यम से गौठान प्रबंधन समितियों को यह अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। गौठान प्रबंधन समितियों द्वारा इस राशि के उपयोग के संबंध में कृषि विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
क्या है रोका-छेका: मवेशियों से फसलों को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ के किसान परंपरागत रूप से बाड़ लगाते रहे हैं। नई योजना ये है कि मवेशियों काे गोठान में ही चारा पानी दे दिया जाए ताकि वे खेतों में न जाएं। इसके लिए गौठान समितियां बनाई गई हैं। मवेशियों के गोबर से जैविक खाद और गोबर गैस बनाई जाएगी। चरागाह में उगने वाली सब्जी और मसाले आदि बेचकर समितियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी।
बहुफसली क्षेत्रों का विस्तार होगा: सीएम ने खुली चराई से खेती को होने वाले नुकसान को रोकने परंपरागत रोका-छेका प्रथा पर गंभीरता से अमल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इससे पूरे वर्ष खेती संभव होगी और बहुफसली क्षेत्रों का विस्तार होगा। रोका-छेका से खेतों, बाड़ियों और उद्यानों की सुरक्षा के साथ पशुधन भी सुरक्षित रहेंगे। इसमें नरवा, गरवा, घुरवा, बारी योजना के तहत गांव-गांव में स्थापित गौठान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। खेती के लिए जैविक खाद उपलब्ध कराने के साथ ही गौठान ग्रामीणों के लिए आजीविका केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।
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