बहुप्रतीक्षित बोधघाट पनबिजली परियोजना को दोबारा शुरू करने राज्य सरकार की सैद्धांतिक सहमति के बाद अब इसका सर्वे शुरू कर दिया गया है। अब बारिश का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे में सर्वे करने वाली कंपनी वेपकोस लिमिटेड के अफसर फिलहाल परियोजना से जुड़ी सारी जानकारी जुटा रहे हैं। इसके लिए जहां जल संसाधन विभाग में मौजूद दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है।
इस बीच बारिश थमने के साथ ही एरियल सर्वे के साथ ही ग्राऊंड सर्वे भी किया जाएगा। बताया जाता है कि कंपनी को सर्वे के साथ ही केंद्रीय मंत्रालयों से मंजूरी दिलाने तक का ठेका जल संसाधन विभाग ने दे रखा है। ऐसे में 20 महीनों में कंपनी को अपना सर्वे परा करने के साथ ही केंद्र रकार के मंत्रालयों से मंजूरी दिलवानी होगी।
माैसम खुलते ही एरियल सर्वे की होगी पहल
जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता शेख शाकिर ने बताया कि वेपकोस लिमिटेड के साथ जल संसाधन विभाग ने अनुबंध कर लिया है। अभी बारिश हो रही है, जिसके चलते कंपनी के अफसर पुरानी जानकारी निकालकर इनका अध्ययन कर रहे हैं। वहीं जैसे ही मौसम खुलता है, मौके पर पहुंचकर सर्वे की पहल की जाएगी।
बारसूर के पास बनने वाली है पनबिजली परियोजना
मालूम हो कि इंद्रावती नदी पर बारसूर में बनने वाली बोधघाट पनबिजली परियोजना में सर्वे के लिए अफसरों ने फाइलों को खंगालना शुरू कर दिया है। इसमें 40 साल पहले शुरू की गई पहल से संबंधित सभी दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। इसके बाद जैसे ही मौसम थोड़ा खुलता है, इलाके का एरियल सर्वे करने की बात कही जा रही है।
12 महीनों तक सर्वे के बाद अगले 8 महीनों तक केंद्र के तीन मंत्रालयों से मंजूरी भी दिलाएगी कंपनी
अलग-अलग चरणों में होने वाले सर्वे के लिए तय 20 महीनों में से 12 महीने तक वेपकोस कंपनी के अफसर अपना सर्वे पूरा कर इसका डीपीआर यानि डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके बाद इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट को कंपनी के अफसर अपने प्रबंधन को भेजेंगे, जहां से अगले 8 महीनों में इस पर केंद्र सरकार के तीन अलग-अलग मंत्रालयों से मंजूरी दिलवाने का काम करेंगे। इसमें केंद्रीय जल आयोग, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से बोधघाट परियोजना को मंजूरी दिलवाने का काम सबसे ज्यादा अहम है।
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