रावघाट रेलवे परियोजना के तहत भाुनप्रतापपुर के किसानों के जमीन को शासन के द्वारा अधिग्रहण किया गया। इसके बदले नौकरी और मुआवजा देने का वादा था। मुआवजा तो मिल गया पर 479 में से 204 प्रभावितों को 12 साल बाद भी नौकरी नहीं मिल पाई है। प्रभावित किसान दर दर की ठोकरें खा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। किसानों ने एक बार फिर से 16 जून को रेलवे के डीआरएम से मुलाकात कर नौकरी की मांग करेंगे। रेलवे प्रभावित किसान नौकरी की मांग के लिए कई चरणों में दिन-रात ट्रैक पर बैठकर आंदोलन व धरना प्रदर्शन कर चुके हैं। इसके चलते अब तक 275 लोगों को ही नौकरी मिल पाई। अब भी 204 लोब नौकरी की मांग को लेकर चक्कर काट रहे हैं।
अधिकारी उदासीन फाइल लटका रहे
प्रभावित किसान फुलबासन, सुशीला दुग्गा, फनेश्वर, मनसाराम यादव, आशाराम नेताम, सामलाल जुर्री ने बताया कि नौकरी की मांग करते वर्षों बीत गए। कई बार आश्वासन दिया गया। अधिकारी फाइलों को लटका देते हैं। कई बार मुलाकात भी की, लेकिन अच्छा परिणाम नहीं मिल पा रहा है।
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