Skip to main content

माता कौशल्या का जन्म कब? इस पर 200 संताें, ज्योतिषियों और बुद्धिजीवियों ने दिए तर्क, तिथि स्टेट बॉर्डर खुलने के बाद होगी तय

माता कौशल्या का जन्म कब हुआ? देशभर के 200 संतों, ज्योतिषियों और बुद्धिजीवियों ने इस पर दूधाधारी मठ को अपने तर्क भेजे हैं। हालांकि जो प्रविष्टियां मठ को भेजी गई हैं, वह अभी बंद लिफाफे में है। इस पर फैसला स्टेट बॉर्डर खुलने के बाद ही हो सकेगा। वो इसलिए क्योंकि जन्मतिथि पर फैसला शंकराचार्यों और देश के प्रमुख संतों वाली ज्यूरी को करना है जो स्टेट बॉर्डर खुलने के बाद छत्तीसगढ़ पहुंचेगी। उनके आने के बाद मठ में धर्मसभा होगी जहां तर्कों को परखा जाएगा। उसके बाद ही सही जन्मतिथि का निर्धारण हो सकेगा।
माता कौशल्या का जन्म छत्तीसगढ़ में हुआ था, यह बात सर्वमान्य है। उलझन माता की जन्मतिथि काे लेकर है। इसे लेकर नवंबर में दूधाधारी मठ ने देशभर के विद्वानों से सुझाव मंगवाए। सही जन्मतिथि बताने वाले को 11 लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा भी की। इसके बाद देशभर से प्रविष्टियां भेजी गईं। इस पर फैसला करने के लिए 2 अप्रैल को रामनवमी के मौके पर मठ में धर्मसभा रखी गई थी। इससे 8 दिन पहले कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए देशभर में लॉकडाउन लगा दिया गया। इसी के चलते धर्मसभा टाल दी गई। अब केंद्र सरकार की ओर से धीरे-धीरे छूट दी जा रही है। पर जब तक स्टेट बॉर्डर नहीं खुलता और स्थितियां सामान्य नहीं हो जातीं, धर्मसभा नहीं होगी। न ही जन्मतिथि का निर्धारण हो सकेगा।

शंकराचार्य से करना होगा शास्त्रार्थ
जन्मतिथि का निर्धारण करने वाली जूरी में शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती और पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती शामिल हो सकते हैं। मठ ने इनसे संपर्क कर धर्मसभा में शामिल होने निवेदन किया था जिस पर शंकराचार्यों ने अपनी सहमति दे दी है। इनके अलावा और भी कई राष्ट्रीय संत इस जूरी में शामिल रहेंगे। जिन्होंने प्रविष्टियां भेजी हैं उन्हें अपने तर्कों से जूरी को संतुष्ट करना होगा। संतों से शास्त्रार्थ कर जो विद्वान सही जन्म तारीख की पुष्टि कर पाएंगे, उन्हें 11 लाख रुपए देकर सम्मानित किया जाएगा।
माता के जन्म को उत्सव के रूप में मनाएंगे
जिसने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को अपनी कोख से जन्म दिया, वह माता महान है। छत्तीसगढ़वासियों के लिए यह गौरव की बात है कि वह माता कौशल्या इसी पावन धरा में जन्मी थी। हम चाहते हैं कि जैसे सभी देवी-देवताओं और महापुरुषों की जन्मतिथि उत्सव के रूप में मनाई जाती है, वैसे ही माता कौशल्या की जयंती भी पूरे देश में उत्साह के साथ मनाई जाए। जन्मतिथि का निर्धारण हो जाने के बाद इसकी शुरुआत छत्तीसगढ़ से ही होगी। इस उत्सव को भव्य बनाने हम राज्य सरकार से सहयोग भी लेंगे।
डॉ. रामसुंदर दास, महंत दूधाधारी मठ
इधर, चंदखुरी में कौशल्या मंदिर के सौंदर्यीकरण का काम रूका
रायपुर से 24 किलोमीटर दूर स्थित चंदखुरी में माता कौशल्या का इकलौता मंदिर है। यहां भगवान श्रीराम माता कौशल्या की गोद में खेलते हुए नजर आते हैं। राम वनगमन पर्यटन परिपथ के तहत राज्य सरकार प्रदेश के उन जगहों को विकसित कर रही है जहां प्रभु श्रीराम ने रूककर कुछ समय व्यतीत किया था। इनमें चंदखुरी का कौशल्या मंदिर भी शामिल है। दिसंबर में सरकार ने इस मंदिर के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण की घोषणा की थी फिर मंत्री ताम्रध्वज साहू की मौजूदगी में यहां निर्माण कार्य शुरू भी हुए। मार्च में लॉकडाउन लगने के साथ ही यहां हो रहे कार्य रूक गए हैं। संभवत: यहां भी काम स्थितियां सामान्य होने के बाद ही दोबारा शुरू हो पाएगा।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
When was Mata Kaushalya born? 200 saints, astrologers and intellectuals argued on this, the date will be fixed after the state border opens


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3eGFEXp
via

Comments