मानसून की दस्तक के साथ हुई बारिश के बाद से जिले में मनरेगा का काम लगभग ठप हो गया है। निर्माण स्थल पर पानी का भराव होने की वजह से काम बंद करने पड़ गए हैं। दूसरी ओर क्वारेंटाइन अवधि पूरी कर घर लौट रहे प्रवासी मजदूर पंचायतों में काम मांग रहे हैं।
जॉब कार्ड के लिए लगातार आवेदन आ रहे हैं जबकि बारिश की वजह से काम बंद हो गए हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रवासियों को रोजगार मुहैया कराने की चुनौती खड़ी हो गई है। जिले में मनरेगा के तहत 2 लाख 26 हजार से ज्यादा मजदूर काम कर रहे थे पर अब यह संख्या घटकर 50 हजार तक पहुंच गई है। लॉकडाउन के बीच जिले में 36 हजार से ज्यादा मजदूरों की वापसी हुई और इन्हे सीधे क्वारेंटाइन कर दिया गया था। क्वारेंटाइन पूरा करने के बाद प्रवासी मजदूर घर लौटने लगे हैं। 33 हजार से ज्यादा मजदूरों की क्वारेंटाइन से वापसी हो चुकी है। इनमें से लगभग 15 हजार प्रवासियों को मनरेगा में काम भी दिया गया।
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