महारानी हॉस्पिटल में डीएमएफटी मद के पैसों की बर्बादी का हर दिन नया उदाहरण सामने आ रहा है। ताजा मामले में हॉस्पिटल में दो नई डायलिसिस मशीन करीब 27 लाख रुपए खर्च कर लगाई जा रही हैं जबकि यहां पहले से ही 4 डायलिसिस मशीनें लगी हुई हैं और इन चारों मशीनों में से दो मशीनें पिछले 6 महीने से कबाड़ में पड़ी हुई हैं।
मिली जानकारी के अनुसार कोरोना के बीच महारानी हॉस्पिटल में करोड़ों रुपए की मशीनरी की खरीदी हुई है। इनमें सबसे पहला नाम डायलसिस का है। यहां 6 मशीनों वाला डायलिसिस यूनिट तैयार करने के नाम पर 18 लाख में निप्रो कंपनी की दो नई मशीनें लाई गई हैं। इसके अलावा यूरोटेक कंपनी की एक आरओ फिल्टर मशीन भी खरीदीगई है।
इस पूरे मामले में खास बात यह है कि अभी महारानी हॉस्पिटल को दो नई मशीनों की जरूरत ही नहीं थी। इसके अलावा मशीनों की खरीदी, नए सेटअप लगाने का काम यहां तैनात एक संविदा कर्मचारी कर रहा है। हॉस्पिटल के डॉक्टरों को भी इस मामले में पूरी-पूरी जानकारी नहीं है। बताया जा रहा है कि डायलिसिस मशीन, आरओ मशीन और फर्स्ट फ्लोर में नए डायलिसिस यूनिट बनाने में करीब 27 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। जबकि वर्तमान में 4 मशीनों वाला सेपरेट यूनिट पहले से मौजूद है। जिसमें से सिर्फ 2 मशीनें ही काम कर रही हैं। 2 मशीनों को जगह नहीं होने की बात कहते हुए धूल खाने के लिए छोड़
दिया गया है।
पहले से लगा आरओ 12 मशीन चलाने में सक्षम
महारानी हॉस्पिटल में पहले से मौजूद चार डायलिसिस मशीनों के लिए करीब सात लाख रूपये की लागत से एक आरओ (रिवर्स आसमोसिस) मशीन लगी हुई है। यह पूरा सेटअप जितेंद्र राठी ने हास्पिटल को दान में दिया था। इस आरओ मशीन की कैपेसिट 12 डायलिसिस मशीन को चलाने की है। इसके बावजूद कोरोना काल में यूरोटेक कंपनी का नया आरओ मशीन खरीदा गया है और इसकी फीटिंग करवाई जा रही है।
हर दिन औसत दो मरीज, लाॅकडाउन में संख्या बढ़ी थी लेकिन इतनी नहीं कि 2 नई मशीनें खरीदें
महारानी हॉस्पिटल में डायलसिस यूनिट पिछले 2 सालों से चल रहा है। यहां दो मशीनें जितेंद्र राठी और अलेक्जेंडर नाम के समाजिक कार्यकर्ताओं ने दान दी थी। इसके बाद 2 मशीनें वन विकास निगम के तत्कालीन अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी ने लगवाई थी। 4 मशीन होने के बावजूद सिर्फ 2 मशीनों से ही इलाज हो रहा था और औसत 2 मरीजों का डायलिसिस हो रहा था। लॉकडाउन में औसत दो मरीजों की संख्या बढ़ाकर 4 के करीब हो गई थी। ऐसे में अभी दो नई मशीनों की खरीदी की कोई विशेष जरूरत नहीं थी। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में भी एक पूरी डायलिसिस यूनिट है जहां लगातार डायलिसिस हो रहा है।
कुछ ऐसे सवाल, जिनके जवाब किसी के पास नहीं
- चार-चार डायलसिस मशीन होने के बाद भी नई दो मशीनों की क्या जरूरत पड़ गई।
- अभी चार डायलसिस मशीन वाले यूनिट को चलाने के लिए स्टाफ नहीं हैं। ऐसे में 6 यूनिट वाले सेटअप को कैसे चलाया जाएगा।
- पहले से जिस आरओ मशीन से 12 डायलिसिस मशीनें चल सकती थी फिर भी नई आरओ मशीन क्यों खरीदी।
- हर दिन औसत दो मरीज का डायलिसिस महारानी में हो रहा है ऐसे में 6 मशीनों का क्या उपयोग होगा।
- पिछले एक साल से महारानी हॉस्पिटल में खरीदी-बिक्री का काम संविदा में तैनात अफसर क्यों कर रहा है।
- 4 मशीन के डायलिसिस यूनिट चलाने के लिए पहले से ही स्टाफ कम हैं। तो नया स्टाफ कहां से आएगा और वेतन कहां से बनेगा।
सीधी बात
विवेक जोशी, सिविल सर्जन
सवाल -दो नई मशीनों की खरीदी की है क्या।
-हां की गई है डीएमएफटी मद से खरीदा है।
सवाल -पहले से चार मशीनें हैं दो नई क्यों खरीदी।
-जगह की कमी की वजह से दो मशीनों में काम हो रहा दो बंद पड़ी थी नया यूनिट तैयार करवाया तो दो नई मशीन ले ली।
सवाल -पुराने आरओ की क्षमता 12 मशीनें चलाने की है फिर भी नया आरओ क्यों लिया।
-पुराना आरओ बीच में खराब हुआ था उसे बनवाने में दस से पंद्रह दिन लगा थे। ऐसे में आपात स्थिति के लिए नया आरओ खरीदा गया है।
सवाल -यूनिट चलाने के लिए स्टाफ नहीं है। शासन का जो सेटअप है उसमें पद भी नहीं काम कैसे होगा।
-संविदा में नई भर्ती की जाएगी। डीएमएफटी से वेतन दिलवाने की कोशिश करेंगे।
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