बचेली में लौह अयस्क की लोडिंग का काम बंद हो जाने के बाद मालगाड़ियों का संचालन भी यहां से दो दिन से बंद है। ऐसे में हर रोज रेलवे को डेढ़ से दो करोड़ का नुकसान हो रहा है। रेलवे को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि आखिर माल परिवहन क्यों बंद है, जबकि किरंदुल से लौह अयस्क का परिवहन जारी है। बताया जाता है कि किरंदुल से लौह अयस्क अर्सेलर-मित्तल कंपनी को बेचा जाता है, वहीं यहां से मालगाड़ियों में लोडिंग कर इसे वाल्टेयर भेजने काफी कम माल भेजा जाता है। किरंदुल से जहां रोजाना एक या दो मालगाड़ी लौह अयस्क भेजा जा रहा है, वहीं बचेली से रोजाना 7 से 8 मालगाड़ियों को वाल्टेयर भेजा जाता है। माल परिवहन की एक मालगाड़ी के लिए एनएमडीसी से रेलवे 20 लाख रुपए लेता है। ऐसे में रोजाना 8 मालगाड़ियों के हिसाब से 1 करोड़ 60 लाख रुपए का भुगतान एनएमडीसी करता है। कई बार मालगाड़ियों के फेरे में 1-2 बार का इजाफा भी हो जाता है। यही कारण है कि रेलवे को रोजाना डेढ़ से दो करोड़ रुपए का नुकसान होने की बात कही जा रही है। इधर बचेली में स्टॉक यार्ड को लेकर एनएमडीसी और राज्य सरकार के बीच चल रही तनातनी के चलते यहां से माल परिवहन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इन हालातों में यहां से मालगाड़ियों का संचालन पूरी तरह से बंद है।
एनएमडीसी के पास 2015 तक स्टॉक यार्ड का था लाइसेंस, फिर मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन, इधर राज्य सरकार की मौखिक सहमति से अब तक चलता रहा काम
मालूम हो कि 3 दिन पहले खनिज विभाग और इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस की संयुक्त टीम ने एनएमडीसी के बचेली स्थित माइनिंग एरिया में दबिश दी थी। टीम ने यहां लोडिंग प्लांट का काम बंद करवा दिया गया। बताया जाता है कि एनएमडीसी के पास साल 2015 तक स्टॉक यार्ड में लौह अयस्क जमा करने का लाइसेंस था। इसके बाद मामला हाईकोर्ट में चला गया, जहां अब भी मामला विचाराधीन है।
किरंदुल से आधे-आधे डिब्बों में भरा लौह अयस्क भेजा
दो दिन से बंद मालगाड़ियों के बीच मंगलवार की दोपहर किरंदुल से एक मालगाड़ी को रवाना किया गया। रेलवे के अफसरों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि मंगलवार को भेजी गई मालगाड़ी को एनएमडीसी प्रबंधन से छिपाकर रवाना किया गया है। यही कारण है कि सभी डिब्बों में आधा-आधा माल भरकर भेजा गया, ताकि दूर से डिब्बे खाली दिखें। उन्होंने ये भी बताया कि मांग पूरा करने की कोशिश तो है, लेकिन जब परिवहन बंद पड़ा हुआ है तो इससे रेलवे को खासा नुकसान होगा।
राज्य सरकार-एनएमडीसी बैठकर बीच का रास्ता निकालें
बचेली-किरंदुल के एनएमडीसी के मजदूर यूनियन के कर्मचारी नेता राजेश संधु ने बताया कि जो भी विवाद है, उसका निपटारा जितनी जल्दी हो सके, कर देना चाहिए। ताकि एनएमडीसी और रेलवे दोनों को नुकसान न उठाना पड़े। काम बंद होने से कर्मचारियों का काम भी बंद पड़ा है। इसके लिए राज्य सरकार और एनएमडीसी को बैठकर विचार-विमर्श कर बीच का रास्ता निकालना चाहिए।
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