भारतीय मजदूर संघ के सार्वजनिक क्षेत्रों के राष्ट्रीय समन्वय समिति की बैठक हुई। जिसमें कोयला, गैर कोयला, रक्षा, रेलवे, पोस्टल, बैंकिंग, इंश्योरेंस, स्टील, मशीन और पीएसयू जैसे टेलीकॉम, पावर, डिफेंस प्रोडक्शन, हैवी इंजीनियरिंग, ऑयल एंड गैस, एफसीआई, एविएशन, केमिकल, करेंसी और सिक्के, एटॉमिक एनर्जी, नालकाे, एनएलसी आदि जैसे क्षेत्रों के बीएमएस यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बीएमएस के केन्द्रीय महामंत्री एमपी सिंह व जिला मंत्री मुश्ताक अहमद ने बताया निजीकरण की प्रक्रिया के खिलाफ बीएमएस की कार्रवाई की योजना तय करने के लिए बैठक आयोजित की गई थी। अलग- अलग क्षेत्रों में केंद्र सरकार द्वारा आक्रामक तरीके से उद्योगों पर हमला किया जा रहा है। कोयला क्षेत्र का व्यावसायीकरण, रक्षा आयुध कारखानों का निजीकरण और रेलवे, बैंकों का विलय और निजीकरण, बीमा, एफडीआई कैप बढ़ाना आदि। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सार्वजनिक व सरकारी क्षेत्र में भारतीय मजदूर संघ की यूनियनें 10 जून को सार्वजनिक क्षेत्र को बचाओ, भारत बचाओ बैनर तले राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेगा। भारतीय मजदूर संघ उपर्युक्त सभी औद्योगिक इकाइयों के द्वारा विरोध में यूनियन स्तर पर एक दिवसीय धरना दिया जाएगा। सरकार के फैसलों से यह देखा जा रहा है कि इसे आगे बढ़ाने और मजदूरों पर थोपने की कोशिश की जा रही है। इस बैठक द्वारा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सार्वजनिक क्षेत्र के योगदान की भूमिका पर चर्चा की गई। इसके साथ ही समाज, राष्ट्र एवं हितधारकों को बचाने के लिए निजीकरण को रोकने की मांग की।
पदाधिकारियों ने कहा कि सरकारी तंत्र को चलाने के लिए सरकार को पैसे की जरूरत है इसलिए अपनी सोच को सही ठहरा रही है। हालांकि अपने पूर्ववर्तियों द्वारा बनाई गई राष्ट्रीय संपत्ति को बेचना सरकार का अधिकार नहीं है। पहले सरकार ने घाटे में चल रही इकाइयों को बेचने के नाम पर एक रणनीतिक कदम उठाने की कोशिश की। लेकिन कोई भी घाटे में चल रही इकाइयों को लेने के लिए तैयार नहीं था, इसलिए सरकार अब महारत्न अथवा नवरत्नों जैसे अत्यधिक लाभकारी क्षेत्रों को बेचने का मन बना रही है।
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