प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बनाने वाले लोगों की मुसीबत बढ़ गई है। 10 महीने से दूसरी व तीसरी किस्त ही नहीं आयी है। इसकी वजह से कई लोगोें का मकान अधूरा पड़ा है। कई लोग उधारी में समान लेकर मकान बना रहे हैं। इस साल 8100 मकानों की मंजूरी मिली है। जिसमें से 6003 को ही प्रथम किस्त की राशि जारी हुई है। इसके बाद राशि ही नहीं आयी है। शासन को 4 साल के किस्त की राशि 35 करोड़ 18 लाख रुपए की डिमांड भेजी है।
जिले के पांचों ब्लाॅक में आवासों का निर्माण कराया जा रहा है। अब चार किस्तों में राशि दी जाती है। प्रथम किस्त में 25 हजार, दूसरी व तीसरी में 40-40 हजार व लास्ट में 15 हजार रुपए देने का प्रावधान बनाया गया है। आवास के लिए 1 लाख 20 हजार रुपए मिलती है, इसके अलावा 15 हजार रुपए मनरेगा से मजदूरी का भुगतान किया जाता है। हितग्राहियों का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से काम बंद था। सीमेंट, रेत, ईंट, छड़ उधार लेकर बनवाए हैं। अब दुकान संचालक पैसे मांग रहे हैं। सरपंच सचिव भी भुगतान नहीं होने से परेशान हैं। क्योंकि ग्रामीण पहले पता करने सरपंचों के पास ही जाते हैं।
जानिए हितग्राहियों की परेशानी उनकी ही जुबानी
पैसे की कमी से नहीं कर पा रहे छत की ढलाई
ग्राम ढुकू पथरा की राधाबाई ने बताया कि दो किस्त ही मिली थी। तीसरी किस्त का इंतजार है। इसके बिना ढलाई नहीं कर पा रहे हैं। मकान अधूरा पड़ा है। बारिश में समस्या होगी। एक छोटे से कमरे में परिवार समेत रहे हैं। किस्त मिल जाती तो अभी तक ढलाई हो जाती। अब बारिश के सीजन में परेशानी होगी।
उधारी के पैसे से मकान का काम शुरू किया
नवापारा के जीवन लाल ने बताया कि मकान अधूरा था। किसी तरह उधारी में छड़ व सीमेंट लगाकर ढलाई कराया हूं। लेकिन अभी तक अंतिम किस्त की राशि नहीं मिली है। अब दुकान का संचालक पैसे की मांग कर रहा है। जिससे मैं परेशान हूं। पहले भी तीसरी किस्त देर से मिली थी।
कच्चे को तोड़ कर बना रहा हूं पक्का मकान
ग्राम लाफा नगोई के राम कुमार ने बताया कि पक्का मकान बनाने के चक्कर में मिट्टी के मकान को तोड़ दिया। अब तक मकान अधूरा है। तीसरी किस्त नहीं मिल पायी है। सामान भी उधार में लाया था। बारिश के समय परेशानी होगी। सामान को दूसरे के घर में रखा हूं। दुकानदार बार-बार रुपए मांग रहा है।
दो साल की चौथी किस्त भी अभी बाकी
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2 साल का चौथी व अंतिम किश्त बाकी है। वर्ष 2016-17 का 3 करोड़ 25 लाख 92 हजार रुपए व 2017-18 का 3 करोड़ 20 लाख 40 हजार रुपए का भुगतान बाकी है। इसी वजह से 35 करोड़ 18 लाख 7 हजार रुपए की डिमांड भेजी गई है।
राशि शीघ्र जारी होने की संभावना: पीओ
जिला पंचायत के परियोजना अधिकारी बीपी भारद्वाज का कहना है कि केन्द्र से ही राशि नहीं आयी है। हितग्राहियों को भुगतान के लिए ऑनलाइन डिमांड पहले ही भेज दी गई थी। राशि शीघ्र जारी होने की संभावना है। अब सब कुछ ऑनलाइन ही होती है। हितग्राहियों के खाते में सीधे राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। अभी जो भी आई थी वह हितग्राहियों के खातों में पहुंच गई है। हमारी ओर से राशि नहीं रोकी जाती है।
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