जिले में 5 जून से गोंचा महापर्व शुरू हो गया है। स्नान दान पूर्णिमा के दिन बीमार पड़े भगवान जगन्नाथ का अनसर काल है। महाप्रभु को स्वस्थ करने तीन पुजारी काढ़ा पिला रहे हैं। बस्तर गोंचा महापर्व की शुरूआत 5 जून से हो गई है। 27 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में अगला विधान 22 जून को नेत्रोत्सव के रूप में होगा। 611 साल से चली आ रही इस परंपरा में पिछले एक दशक की तरह भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का श्रृंगार इस बार भी गुजरात के सोनारों और टेंपल कमेटी के 10 किलो के गहनों से किया जाएगा।
पुरी की तर्ज पर मनाए जाने वाले इस पर्व में नेत्रोत्सव में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के विग्रहों को सजाने की रस्म के दौरान टेंपल कमेटी के गहनों से 3 विग्रहों का और बाकी के बचे 19 विग्रहों का श्रृंगार 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज की ओर से बनवाए गए गहनों से होगा। वहीं दूसरी तरफ नेत्रोत्सव के बाद निकलने वाले रथ यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसके लिए जहां मदिर की सफाई के साथ ही पुताई करवाई जा रही है तो वहीं रथ निर्माण के लिए योजना बनाई जा रही है। हालांकि रथ निर्माण के बाद भी रथ यात्रा होगी इसको लेकर असमंजस अब भी बरकरार है। समाज के अध्यक्ष हेमंत पांडे ने कहा कि रथयात्रा को लेकर कलेक्टर रजत बंसल से मिले थे। उन्होंने रथ निर्माण की स्वीकृति दी है। पांडे ने बताया कि इसकी जानकारी धर्मस्व विभाग को भेज दी गई है। वहां से अभी इसकी कोई जानकारी नहीं मिली है जिला प्रशासन और धर्मस्व विभाग से मिले निर्देश पर ही गोंचा पर्व मनाया जाएगा।
अभी नहीं मिली है रथयात्रा निकालने की अनुमति
तहसीलदार मधुकर सिरमौर ने कहा कि कलेक्टर से मिले निर्देश के तहत 360 घर आरण्यक ब्राहम्ण समाज के लोगों को रथ निर्माण कराने की अनुमति दे दी गई है लेकिन पूर्व की भांति तीन रथों में रथयात्रा निकालने की अनुमति अभी नहीं दी गई है। इस काम के लिए अभी 10 दिन का समय बाकी है जिसके चलते इसका निर्णय रथ यात्रा के दो या तीन दिन पहले ले लिया जाएगा।
बृजलाल विश्वकर्मा सजाएंगे विग्रहों को
नेत्रोत्सव में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रहों को सजाने की परंपरा का पालन इस साल भी बृजलाल विश्वकर्मा के द्वारा ही किया जाएगा। समाज के अध्यक्ष ने बताया कि करीब 40 साल से वे यह काम करते रहे हैं। इस साल भी वे इस काम को अंजाम देंगे। वे बुधवार को आएंगे इसके बाद वे अपना काम शुरू करेंगे।
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