भाजपा ने 18 जिलों में दो पूर्व विधायक, एक पूर्व सांसद, 6 महामंत्री को कमान सौंपी है, लेकिन 11 जिलों की नियुक्तियां गुटबाजी के कारण अब भी फंसी हुई है। इनमें रायपुर, रायपुर ग्रामीण, दुर्ग और भिलाई जैसे जिले हैं, जहां कई नेताओं का दबदबा है। अब तो आलम यह है कि बड़े नेता भी अपने समर्थकों का नाम उजागर करने में बच रहे हैं, जिससे नाम पर कैंची न चल जाए। अब दावेदारों से नए सिरे से चर्चा करने के बजाय बड़े नेता आपस में बातचीत कर सभी जिलों के अध्यक्ष तय करेंगे। एक नए संगठन जिले गौरेला पेंड्रा मरवाही का भी गठन कर नियुक्ति की जाएगी। भाजपा संगठन में पिछले साल नवंबर से नियुक्तियां चल रही हैं। इसके बाद से ही 11 जिलों की नियुक्तियों पर चुनाव के कारण स्टे लग गया। हालांकि बड़े नेताओं ने सभी जिलों के पदाधिकारियों के साथ बैठकर चर्चा की थी, लेकिन एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई थी। जिन जिलों में नियुक्तियां हुईं, उनमें से कुछ में संगठन के ही नेता को प्रमोट कर जिले की कमान सौंपी गई। इनमें भी अधिकांश ऐसे जिले हैं, जहां के किसी एक नेता का प्रभाव है। इस वजह से बिना विवाद के एक नाम पर सहमति बना ली गई।
कई पुराने नेताओं को मिला मौका
बालोद के कृष्णकांत पवार, कवर्धा के अनिल सिंह, सुकमा के हुंगाराम मरकाम, बिलासपुर के रामदेव कुमावत, बीजापुर के श्रीनिवास मुदलियार और रायगढ़ के उमेश अग्रवाल को महामंत्री से प्रमोट कर जिलाध्यक्ष बनाया गया। बेमेतरा में ओमप्रकाश जोशी और धमतरी मे शशि पवार को कोषाध्यक्ष से प्रमोट किया गया। कोरिया के कृष्णबिहारी जायसवाल उपाध्यक्ष व कोंडागांव के दीपेश अराेरा मंत्री से जिलाध्यक्ष बने। बलौदाबाजार में पूर्व विधायक डॉ. सनम जांगड़े और महासमुंद में रूपकुमारी चौधरी को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। राजनांदगांव में पूर्व सांसद मधुसूदन यादव को जिलाध्यक्ष बनाया गया है।
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