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Jharkhand daily news

मुकद्दस महीने रमजान में एक नेकी के बदले 70 नेकियों का सवाब मिलता है।
रहमतों और बरकतों के इन दिनों में रोजेदार न सिर्फ खुदा के लिए अपनी शिद्दत बल्कि इंसानियत के लिए अपनी चाहत भी परखते हैं। झुमरी तिलैया निवासी समाजसेवी अरशद खान की 8 वर्षीय बेटी अनिला जन्नत ने इस रमजान में अपना पहला रोजा रखा। इतनी छोटी उम्र में भी लगातार 20 दिनों से रोजा रख रमजान में सवाब कमाया। अनिल ने बताया कि अम्मी को रोजा रखती देख उनसे रोजा रखने की इच्छा हुई । वह परिवार के साथ सहरी की नमाज पढ़ती। उसने बताया की इफ्तार में अम्मी उसकी मनपसंद चीजें बनाती है। दिन तस्बीह व नमाज पढ़ने में गुजर जाता है। नन्ही बच्ची ने बताया की उसकी हर इबादत में लोगों की भलाई और अपने भारत देश सहित पुरे विश्व से कोरोना जैसी वैश्विक महामारी को समाप्त कर देने की दुआ होती है । वह बताती है की पाक महीने में कुरआन शरीफ नाजिल हुआ था। उसने बताया की उनकी दीदी 13 वर्षीय रिदा जन्नत पिछले साल से ही रोज़ा रख रही है तभी से घरों में सबाें को रोज़ा रखा देख उसने मन बना लिया था।पिता अरशद खान ने कहा कि इतनी छोटी उम्र में रोज़ा का सोच थोड़ा हिचक में था लेकिन बेटी की जिद के आगे एक ना चली। उल्लेखनीय हो की कोरोना संक्रमण को लेकर लॉकडाउन के चलते इस बार रमजान माह में मस्जिद के बजाए लोग अपने घरों में रोजे रखकर नमाज अदा कर रहे हैं।



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During the month of Ramadan, even small children are keeping Roja


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