कोरोना की वजह से पूरे देश में बंदी है। इस वजह से हमें तालाब चाहे बड़े हो या छोटे उसकी मछलियों का खास ध्यान रखने की ज़रुरत है। लेकिन कोरोना बंदी में बाजार से मछलियों का आहार मिल पाना मुश्किल है। ऐसी परिस्थिति में मत्स्य किसान घरों में रखे सामानों से मछली के आहार का निर्माण कर इसका लाभ उठा सकते हैं। मछली पालकों को यह सुझाव केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान मुंबई के वैज्ञानिक डॉ. सिकेन्दर कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि मत्स्य पालक सरसों की खली, मकई, चावल के भूसी, गेहूं का आटा ,सोयाबीन के पाउडर एवं विटामिन मिनरल मिक्सचर इस्तेमाल कर घरों में मछलियों के लिए आहार तैयार कर सकते हैं । उन्होंने बताया कि तालाब में मछलियों को 28-30 प्रतिशत प्रोटीन और 4-6 प्रतिशत वासा निर्मित आहार की ज़रुरत होती है। घर में निर्मित आहार में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और वसा पाया जाता है| इन आहार को बनाने के लिए मुख्य रूप से दो छोटी मशीनों की ज़रुरत पड़ती है ।
एक है किचन मिक्सर और दूसरा हाथ रहित या मोटर रहित छोटा फीड पेलेटाइजर । किचन मिक्सर से सरसों की खली, खुद्दी चावल, मकई आदि को पाउडर किया जाता है और छोटे फीड पेलेटाइजर से फीड का दाना तैयार किया जाता है । फीड के दाना बनाने के बाद उसको धूप में सूखा लिया जाता है ।इसके बाद इसे तालाब में इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि मछलियों की वृद्धि के लिए प्रोटीन आहार जरुरी है। तालाब में मछलियों को फीड देना आवश्यक होता है ।जिससे की उनकी वृद्धि दर में कोई कमी नहीं आ सके। उल्लेखनीय है कि भारत में कार्प मछलियों के पालन के लिए विख्यात है, जो कुल मछली पालन का 80 प्रतिशत होता है ।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2XArrEp
via IFTTT
Comments
Post a Comment