शहर से सटे बेहरा टोली बस्ती में करीब 67 परिवारों के पास न तो राशन कार्ड हैं। और न ही उन्हें कहीं से जीविकोपार्जन के लिए अनाज मिल रहा है। ऐसे में इन परिवारों को लॉक डाउन के बीच राशन की भारी किल्लत से जूझना पड़ रहा है। रोज-कमाने खाने वाले इन परिवारों को कहीं से कोई मदद भी नहीं मिल पा रहा हैं।बस्ती में निवास करने वाले अधिकतर लोग दिहाड़ी मजदूर, ठेले वाले व सब्जी विक्रेता हैं। 22 मार्च से जनता कर्फ्यू लगने के बाद से कोई भी काम पर नहीं निकल रहे है। लॉकडाउन लागू होने व लगातार घरों में रहने के बाद इन परिवारों के पास बचा-कुछा पैसा भी खत्म हो गया है। वहीं कई घरों में राशन के लाले पड़ गए है। जबकि कई घरों में खत्म होने के कगार पर है। इन परिवारों का कहना है कि उनके पास राशन कार्ड या फिर लेबर कार्ड नहीं है। कई बार उन्होंने राशन कार्ड बनवाने के प्रयास किए।
ऑनलाइन आवेदन दी। लेकिन उन्हें सुविधा नहीं मिल सकी। कई लोगो का सफेद कार्ड बना दिया गया। जो बेकार साबित हो रहा है। ऐसे में उन्हें सस्ते सरकारी राशन का लाभ नहीं मिल रहा है। रोज-कमाने खाने के कारण ज्यादा पैसा पास नहीं है। ऐसे में अब राशन की किल्लत बढ़ने लगी है। परिवार चलना मुश्किल हो रहा है। कई स्थानों में राशन डीलर द्वारा जिनके पास कार्ड नहीं है उन्हें भी सरकार के आदेश पर राशन दिया जा रहा है। जबकि इस इलाके के राशन डीलर द्वारा राशन नही दिया जा रहा है। संपन्न लोगों का यहां बहुसंख्यक कार्ड बना है। गरीब के जगह संपन्न लोग राशन ले रहे है। वहीं मनरेगा जैसी योजनाओं में भी काम नहीं मिलता है।
बेहरा टोली के इन परिवारों के समक्ष पड़े है खाने के लाले
बेहरा टोली बस्ती के तारा तिर्की, गुजरा, इमा कुल्लू, नीलिमा,सिकुन्दा मिंज, मैनो उरांव, बसंती खलखो,मुक्ति बरवा, नीलिमा तिर्की, बुधनी तिग्गा, बिरसमुनी, मारियानी, जीतन उरांव, बसंती तिर्की, सुशीला तिर्की, रोशनी तिर्की, सोमारी तिर्की, एतवारी, बुध्मानी देवी, सोनी उरांव, सुहाती डुंगडुंग, अनिता तिग्गा, बसंती, पत्रसियो, अनिता खलखो, कलावती, लछमी, छेनो, भिखारी खालको, पंडो देवी, सीखा, बूटा इन तिर्की समेत 67 परिवार के लोग शामिल है।
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