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Jharkhand daily news

टेरर फंडिंग जांच के दायरे में झारखंड के कई पुलिस अफसर हैं। एनआईए ने इन अफसरों से पूछताछ की कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच में कई साक्ष्य मिले हैं, जिससे मगध आम्रपाली कोल परियोजना से अवैध वसूली का हिस्सा पुलिस, नेता व पत्रकारों तक पहुंचने का खुलासा हुआ है। अब इन साक्ष्यों के आधार पर पुलिस विभाग में डीजी, एडीजी रैंक के अफसरों पर गाज गिर सकती है। उल्लेखनीय है कि एनआईए ने 6 नवंबर 2018 को टंडवा के कामता गांव निवासी सुभान मियां को जेल भेजा था।

चतरा में मगध, आम्रपाली सहित अन्य कोल परियोजनाओं में उग्रवादी संगठनों, ग्रामीण, पुलिस और सीसीएल के बीच मुख्य लाइजनर की भूमिका सुभान मियां ही निभाता था। सुभान ने एनआईए को कई अहम सूचनाएं दी हैं। इससे पहले 16 मई 2018 को झारखंड में एनआईए ने टेरर फंडिंग की जांच शुरू की थी। इसे लेकर एनआईए डीजी योगेश चंद्र मोदी ने झारखंड पुलिस के आला अफसरों के साथ बैठक भी की थी।
अवैध वसूली के पैसे से रांची में अफसरों ने खरीदा बड़ा प्लॉट
टेरर फंडिंग की जांच रुकवाने के लिए लाइजनर सुभान मियां पुलिस मुख्यालय में एक आला अधिकारी से मिला था। मुलाकात में उसी पुलिस अफसर की रिश्तेदार की भूमिका थी। एनआईए को पता चला है कि कुछ वरीय अफसर के लोग हर माह मोटी रकम लेते थे। इस राशि से रांची के तुपुदाना और रातू में बड़ा प्लॉट खरीदा गया है।



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