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Jharkhand daily news

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को लेकर घोषित लॉक डाउन में भरनो में पूरा असर डाला है। जिस कारण भरनो के गोपालक किसानों के समक्ष आर्थिक संकट गहरा गया है। पिछले एक माह से लॉकडाउन में भरनो के सभी होटल, रेस्टाेरेंट, ठेल और चाय की गुमटियां बंद है जिसके कारण गोपालक किसानों के दूध की बिक्री नहीं हो पा रही है। दूध नहीं बिकने के कारण इन किसानों के समक्ष आर्थिक संकट गहरा गया है। आर्थिक तंगी के कारण किसान गायों को सही ढंग से चारा भी नहीं खिला पा रहे हैं। लॉकडाउन में दुकानदारों ने पशु चारा की कीमत भी बढ़ा दी है।

पर्याप्त मात्रा में चारा नहीं मिलने से किसान की गायें-भैंस भी बीमार पड़ रही हैं। भरनो प्रखंड के गोपालक उत्पादित दूध को भरनो मुख्यालय स्थित कई होटलों में बिक्री करते थे। भरनो प्रखंड के भरनो, तुरिअम्बा, डहूटोली, पीपीरटोली, समसेरा, जामटोली, मलगो, बोंडो, कुम्हरों आदि गांव के किसान गौ पालन कर दूध का कारोबार करते हैं। लॉकडाउन में इन किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। भरनो के गौ पालक सूरज केसरी ने बताया कि उसने बैंकों से लाखों रुपए का कर्ज लेकर खटाल खोला है। उसके खटाल में रोजाना लगभग डेढ़ सौ लीटर दूध का उत्पादन होता है।


जिसे वह अपने मुख्यालय चौक स्थित होटल में मिठाई बनाने के साथ दूध की बिक्री भी करता है। परंतु इधर लॉकडाउन में दूध की बिक्री बंद होने से हमारे परिवार के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। गौ पालकों पर प्रशासन का भी ध्यान नहीं है। सूरज केशरी ने बताया कि सरकार द्वारा भरनो व गुमला जिले में किसानों के दूध खरीद की कोई व्यवस्था नहीं है। अन्य जिलों में दूध संग्रह केंद्र के माध्यम से किसानों का दूध खरीदा जाता है।



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Gepalca's financial situation deteriorated due to non-sale of milk


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