(राजीव कुकरेजा)प्रोविडेंट फंड (पीएफ) में अंशदान को लेकर सरकार के नए दिशा निर्देशों के अनुसार अब कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड में अगले 3 महीने तक अंशदान 4 फीसदी घट जाएगा। इससे जहां नियोक्ता को फायदा होगा, वहीं कर्मचारियों को फिलहाल हाथ में ज्यादा रकम आएगी। लेकिन इस फैसले का दूरगामी असर पड़ेगा और कर्मचारी का रिटायरमेंट कॉरपस घट जाएगा। इससे उसकी पेंशन भी घट जाएगी। अभी कर्मचारी की 12 फीसदी राशि और नियोक्ता की 8 फीसदी राशि कर्मचारी के खाते में जमा होती है जबकि नियोक्ता के मद की 4 फीसदी राशि पेंशन फंड में जमा होती है। तीन महीने तक कर्मचारियों की टेक होम सैलेरी बढ़ जाने से उनके हाथ में ज्यादा पैसे आएंगे। आयकर के जानकारों का कहना है कि एेसे में कर्मचारी के स्लैब के अनुसार उनकी आय कर देनदारी भी बढ़ जाएगी। जो कर्मचारी जिस स्लैब में आएंगे, उस हिसाब से उन्हें आयकर भरना होगा।
सरकार के फैसले से नियोक्ता को लाभ कर्मियों को भी होगा तात्कालिक फायदा
सरकार ने जो फैसला किया है, उससे अब सभी कर्मचारियों के मूल वेतन में से ईपीएफ का योगदान 12 फीसदी के बजाए 10 फीसदी होगा। इसका सीधा मतलब है कि इससे नियोक्ता को कर्मचारियों को दिए जाने वाले मूल वेतन का 2 फीसदी कम देना होगा। यह उसकी बचत होगी। इसके साथ ही कर्मचारियों को भी हर महीने 2 फीसदी ज्यादा वेतन हाथ में आएगा। -मनीषा बियाणी, अध्यक्ष द चार्टर्ड एकाउंटेंट अॉफ इंडिया रांची
पेंशन फंड में मात्र 2 फीसदी राशि जाएगी
इस समय जो व्यवस्था है, उसके अनुसार कर्मचारी की 12 फीसदी राशि और नियोक्ता की 8 फीसदी राशि कर्मचारी के खाते में जमा होती है जबकि नियोक्ता के मद की 4 फीसदी राशि पेंशन फंड में जमा होती है। इसे ऐसे ही छोड़ा जाता है तो पेंशन फंड में महज 2फीसदी राशि जाएगी। तब कर्मचारी की पेंशन भी घट जाएगी। हां अगर ईपीएफओ कहता है कि पेंशन फंड में पूर्ववत 4 फीसदी राशि का योगदान होता रहेगा तब पेंशन पूर्ववत रहेगी।-विकास आनंद, क्षेत्रीय आयुक्त भविष्य निधि झारखंड
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