“माड़िया’ नाम सुनते ही जेहन में जंगल में रहने वाले आदिवासियों जनजाति की छवि बनती है। जो विकास की मुख्यधारा से अलग रहकर जंगलों में रहना और जीना पसंद करते हैं। खाने में कंद-मूल और रहने के लिए लकड़ी और पत्तों से बने घर। लेकिन अब ये पुरानी बात हो गई है। आज के माडिया पूरी तरह बदल चुके हैं। अब के देश के मैदानी इलाकों मं रहने वाले लोगों की तरह हाईटेक हो गए हैं। टच स्क्रीन मोबाइल चलाना जानते हैं। पढाई में भी आगे हैं। ये सब हुआ है इन जंगल क्षेत्रों में पहुंचे रहे विकास योजनाओं के कारण।
ओरछा ब्लॉक (अबूझमाड़) के माड़िया जनजाति आधुनिकता की दौड़ से कोसों दूर थे। विषम भौगोलिक परिस्थतियों से इस क्षेत्र में सुविधाओं का अभाव होने के कारण माड़िया लोग देश-दुनिया में होने वाली गतिविधियों से भी अनजान बने रहते थे। हालांकि अब अबूझमाड़ को बूझने के लिए नई पहल शुरू हो गई है। अब माड़ में विकास का पहिया घूम रहा है। चौतरफा हो रहे विकास से माड़िया लोगों के चेहरे पर मुस्कान आने लगी है। ओरछा ब्लॉक के ग्राम बासिंग में पहला मिनी थिएटर कम डेवलेपमेंट सेंटर खोला गया। थिएटर के खुल जाने से अबूझमाड़ियों का मनोरंजन के साथ ही देश-दुनिया की ताजा खबरों और गतिविधियों के बारे में जानकारी मिल रही है।
नेट कनेक्टिविटी हुई बेहतर तो काम हो रहे ऑनलाइन
कलेक्टर पीएस एल्मा ने कहा कि 11 मई 2007 में बनाए गए दो जिलों में से नारायणपुर जिला एक है। 13 साल पहले बनाए गए इस जिले का विकास लगातार किया जा रहा है। अबूझमाड़ इन इलाकों में नेट कनेक्टिविटी पहले से काफी बेहतर हो गई है। कलेक्टर ने कहा कि नारायणपुर जिले में बैंक के साथ अन्य सरकारी काम ऑनलाइन हो रहे है। दूर-दराज वाले इलाके में घर-घर तक बिजली की सुविधा मुहैय्या कराना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य था लेकिन इस दिशा में किए गए कामों की लोगों ने सराहना की है। जहां पारंपरिक बिजली लाइन नहीं पहुंचाई जा सकी, वहां सौर ऊर्जा चलित संयत्र स्थापित कर बिजली मुहैय्या कराई जा रही है। बिजली की व्यवस्था होने से ग्रामीणों को सुविधा हुई।
ट्रांजिट हॉस्टल और रेस्ट हाउस बनकर तैयार
ओरछा मुख्यालय में नवीन तहसील कार्यालय के साथ-साथ अधिकारी, कर्मचारियों को सरकारी आवास का निर्माण भी तेज गति से हो रहा है। वहीं ट्रांजिट हॉस्टल का काम भी पूरा हो गया है। प्रकृति को करीब से जानने और समझने वालों के लिए उनके रूकने के लिए आधुनिक सुख-सुविधाओं और स्थानीय कला से सज्जित और फर्नीचर से परिपूर्ण नवीन रेस्ट हाऊस बनकर तैयार हो गया है। छोटी पहाड़ी पर स्थित यहां से सुबह और शाम के समय घने जंगल, खूबसूरत नजारे और पहाड़ों को निहारने का आनंद ही अलग है।
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