बरही विधायक उमाशंकर अकेला की ओर से विधानसभा में शून्य काल के दौरान गत 20 मार्च को कोडरमा जिला अंतर्गत मौजा उरवां मदनगुंडी व चंदवारा से गुजरने वाले एनएचएआई-31 फोरलेन सड़क के किनारे रैयतों की जमीनों का मुआवजा सरकारी प्रावधानों के विपरीत जमीन की प्रकृति बदलकर औने-पौने कीमत लगाकर पदाधिकारियों द्वारा मुआवजा तय किए जाने के मामले में विधानसभा के संयुक्त सचिव संतोष कुमार सिंह ने पथ निर्माण विभाग के सचिव से जवाब मांगा है। विभाग के सचिव को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि विधानसभा की प्रक्रिया व कार्य संचालन के नियम-304(6) के तहत 15 दिनों के अंदर सुस्पष्ट प्रतिवेदन सभा सचिवालय व सदन में शून्य काल में सूचना उठाने वाले सदस्य को भेजने की कृपा की जाए, ताकि इसका निष्पादन ससमय किया जा सके।
उन्होंने कहा है कि उक्त नियम के आलोक में प्राप्त उत्तरों की संकलित प्रति अगले सत्र के प्रथम दिन या विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति से किसी अन्य दिन सभा पटल पर रखा जाना है। इसलिए समय अवधि पर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। उल्लेखनीय हो कि विधायक अकेला ने शून्य काल में सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा था कि फोरलेन सड़क के किनारे सैकड़ों रैयतों की जमीन अधिग्रहित कर ली गई है और इसका मुआवजा प्रावधानों के विपरीत जमीन की प्रकृति बदलकर औने पौने कीमत लगाकर घुसखोर पदाधिकारियों द्वारा मुआवजा तय कर दिया गया है, जबकि अखबारों में उचित प्रकृति 1 मार्च 2016 को दिखाई गई। उन्होंने सदन के माध्यम से रैयतों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए सरकार से आग्रह किया है।
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