मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य के किसानों, गरीबों एवं मजदूरों की बेहतरी के काम में किसी भी तरह की कमी आड़े नहीं आएगी। सीएम शुक्रवार रात राज्य के विभिन्न अंचलों के किसानों से आए किसानों से चर्चा कर रहे थे। किसान राजीव गांधी किसान न्याय योजना के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आभार जताने आए थे।
सीएम ने कहा कि राज्य में धान, मक्का और गन्ना उत्पादक कृषकों को 5750 करोड़ रूपए की राशि मिलेगी। इसमें अगले चरण में भूमिहीन कृषि मजदूरों को भी शामिल किया जाएगा। आगामी वर्ष से इस योजना में दलहन-तिलहन की खेती करने वाले किसानों को भी लाभान्वित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार और देश की अन्य राज्य सरकारें कोरोना संकट के चलते कई कामों एवं वेतन में कटौती कर रहीं हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के कर्मचारियों के हितों पर आंच नहीं आने दी है, हमने अपने कर्मचारियों के वेतन में किसी भी तरह की कटौती नहीं की है। उन्होंने कहा कि मनरेगा में 23 लाख लोगों को रोजाना काम मिल रहा है। इसी तरह से 13 लाख संग्राहक परिवारों को तेंदूपत्ता एवं लघु वनोपज संग्रहण के जरिए 2500 करोड़ रूपए मिलेगा।
पीसीसी चीफ और विधायक मोहन मरकाम ने कहा कि किसानों और गरीबों की मदद को लेकर प्रदेश सरकार देश में रोल मॉडल बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने वायदे को पूरा किया है। पूर्व विधायक बैजनाथ चंद्राकर ने कहा कि सरकार की नीतियों के चलते आज लोग खेती-किसानी में रूचि लेने लगे हैं। उन्होंने न्याय योजना के लिए बिलासपुर के किसानों की ओर से मुख्यमंत्री का आभार जताया। बलौदाबाजार के कृषक रामविलास साहू, राजनांदगांव के मुरली वर्मा, रायपुर के प्रमोद अग्रवाल, राजनांदगांव के कमलू निषाद, कवर्धा के महेश चंद्रवंशी, खरोरा के डॉ. महेन्द्र देवांगन, कुरूद के शिरीष साहू, महासमुंद के महेन्द्र चन्द्राकार ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल ने कोरोना संकट की कठिन परिस्थिति में किसानों की मदद की है। उन्होंने अपनी ओर से मुख्यमंत्री सहायता कोष में करीब 6 लाख के
सहायता राशि का चेक भी मुख्यमंत्री को भेंट किया।
कृषि को उद्योग और समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देने की मांग
दूसरी ओर किसान मोर्चे ने समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा और कृषि को उद्योग का दर्जा देने की मांग की है। भाजपा-कांग्रेस के नेताओं द्वारा किसान हितैषी बयानबाजी पर छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के प्रांतीय प्रवक्ता जागेश्वर प्रसाद ने कहा है कि दोनों पार्टी की सरकार किसानों को केवल वोट बैंक समझते हैं। प्रसाद ने कहा कि वे किसान और खेतिहर मजदूरों के हितैषी होते तो केंद्र सरकार स्वामीनाथन कमेटी के सुझाव के मुताबिक लागत मूल्य से 50 % लाभांश जोड़कर धान, गेंहू, गन्ना औऱ दलहन-तिलहन का समर्थन मूल्य घोषित करती। सभी वर्ग के मजदूरों की माहवारी मजदूरी 10 हजार रुपए करती। उसी प्रकार से कांग्रेस की राज्य सरकार किसानों को एक किस्त में देने के बजाय 4 क़िस्त में देने की नीति किसानों को छलना है। छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के प्रदेश नेता अनिल दुबे, जी.पी.चंद्राकर, दीनदयाल वर्मा, लालाराम वर्मा,अशोक ताम्रकार ने है कि जब-तक समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा दिया जाए।
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