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आंध्र से बच्चे को गोद में लिए पैदल आईं ताकि घर पहुंचे और सुरक्षित रहें

कोरोना की जंग में यूं तो डॉक्टर, पुलिस, स्वास्थ्यकर्मी, सफाईकर्मी समेत कई योद्धा हैं लेकिन इन सबसे अलग वे माताएं भी इस जंग में अपने बच्चे अपने परिवार को सुरक्षित करने के लिए आगे आई हैं। अपने नौनिहालों को गोद में लिए ढाई-तीन सौ किमी का पैदल सफर करने के बाद ये महिलाएं कोंटा में आंध्र-छग बॉर्डर पर पहुंचीं और पिछले 4 दिनों से डेरा डाले हुए हैं। मुंगेली की प्रीति अपने डेढ़ साल के बच्चे को साथ लेकर पति के साथ मजदूरी करने हैदराबाद गई थी। बच्चे को कभी कंधे पर तो कभी गोद में लेकर यहां तक पहुंची है।

  • 250 किलोमीटर से ज्यादा पैदल गोद में बच्चों को लेकर आईं महिलाएं
  • 04 दिन से कोंटा में आंध्र-छग बॉर्डर पर डेरा डाले हैं ये माताएं

गोद में 7 महीने का मासूम
मुंगेली की ही विमल देवी अपने 4 बच्चों के साथ विजयवाड़ा से पैदल यहां पहुंची हैं। गोद में इनमें सबसे छोटा सालभर का बच्चा और दूसरे हाथ में सामान की गठरी है। इन सबसे अलग मुंगेली की ही कुंती बाई अपने 7 महीने के बच्चे को गोद में लेकर हैदराबाद से ढाई सौ किमी का पैदल सफर कर यहां तक चली आई। सिर्फ इसलिए कि उनका बच्चा उनका परिवार कोरोना से सुरक्षित रहे।



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From Andhra came the child on his lap to reach home and stay safe


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