उद्यानिकी विभाग “टिशू कल्चर” के जरिए केले की उन्नत किस्म की नर्सरी तैयार कर रहा है। विभाग का दावा है कि इन पौधों से एक एकड़ की फसल पर सालभर में साढ़े तीन लाख रुपए तक का मुनाफा हो सकता है। इस पर औसत 60 हजार रुपए तक का खर्च आएगा। ये नर्सरी किसानों को अभी फ्री में दी जा रही है, किसान 10 एकड़ तक के खेत के लिए नर्सरी ले सकते हैं। जिले के सराईपाली गांव और कुड़ुमकेला के किसान इसकी खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। केले की इस नर्सरी से जिले में दो किसान बड़े पैमाने पर व्यावसायिक खेती कर रहे हैं। गे रवानी सराईपाली के राम सिदार ने दो एकड़ खेत पर फल लगाई है। जबकि घरघोड़ा के कुड़ुमकेला गांव के रामलखन सिंह 4 एकड़ में इसकी खेती कर रहे हैं। इन्होंने बताया कि इस उन्नत किस्म के पौधों की खास बात यह है कि इनपर उगने वाले केले एक साइज के होते हैं। इनमें ग्रोथ एक जैसी होती है। ऐसे केलों को अच्छी कीमत मिलती है। इसकी खेती के लिए खेत का समतल होना जरूरी है। पत्तियों में धब्बा रोग या कीट न लगे इसके लिए हर महीने उर्वरक खाद्य का छिड़काव करना पड़ता है।
पौधे लगाने की विधि
समतल खेत में निश्चित दूरी पर लगभग हर 2 मीटर पर एक फीट लंबा-चौड़ा और गहरा गड्डा खोदना होता है। उसमें खाद, गोबर सहित उर्वरक डालकर उसे भर दें। फिर गड्ढे के बीचों बीच एक पौधा लगा दें। जिसमें गर्मी के दिनों में 3-4 दिनों में सिंचाई करें। बारिश में सिंचाई की जरूरत नहीं है। ठंड में हफ्ते में एक बार पौधों को पानी दें।
कितना होता है उत्पादन-लाभ
सहायक संचालक एमके पटेल ने बताया कि प्रति एकड़ में लगभग 1500 पौधे लगाए जा सकते हैं। 6 महीने बाद फूल आने लगते हैं। फूल आने के 5 महीने बाद फल आते हैं। एक पेड़ से औसतन 35-40 किलो वजन का घेर निकलता है। मार्केट में कच्चे केले के रूप में औसतन 15 रुपए के हिसाब से बेचने पर एक घेर से लगभग 500 रुपए मिल जाते हैं। औसतन एक हजार पौधों से साढ़े चार लाख रुपए तक मुनाफा कमा सकते हैं।
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