(शेखर घोष).दिल्ली में कोरोना से संक्रमित स्वास्थ्य कर्मियों का आंकड़ा 300 के पार जा चुका है। कोरोना वॉरियर्स पर वायरस अटैक के पीछे उन तमाम नियमों और मानकों में हीलाहवाली बरतना है जो कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए बनाए गए हैं। सबसे बड़ी समस्या पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) किट को लेकर है। केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे ऐसी सर्टिफाइड किट ही खरीदें, लेकिन दिल्ली सरकार ने जो पीपीई खरीदी वे मानकों के अनुसार नहीं थी। दिल्ली सरकार के डीजीएचएस मुख्यालय में तैनात डॉक्टर ने बताया कि दिल्ली के किसी भी सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को उपचार के दौरान भारत सरकार से आए कुछ पीपीई किटों को छोड़कर नियमों के अनुसार आईएसओ व बीआईएस सर्टिफाइड पीपीई किट उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं।
दैनिक भास्कर ने पद्मिनी सिंगला, हेल्थ सेक्रेटरी, दिल्ली सरकार से नियम के विपरीत पीपीई किट खरीदने के बारे में जानने के लिए कई बार कॉल किया। कॉल का जबाव नहीं देने पर उन्हें एसएमएस कर उन्हें विभाग का पक्ष देने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने कोई जबाव नहीं दिया। डॉ. नूतन ने कई बार पूछने पर भी यह जबाव नहीं दिया कि केन्द्र सरकार के निर्देश के बाद भी पीपीई किट क्यों खरीदी।
खराब पीपीई किट का सैंपल पास नहीं करने पर डीजीएचएस निदेशक ने कर दिया ट्रांसफर : डीजीएचएस (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज) ने पहली बार जब पीपीई किट खरीदी, तो एक किट जांच कमेटी बनाई। इस कमेटी में डीजीएचएस निदेशालय के स्टोर में तैनात डॉ. विशाल धीर को रखा गया। उनके पास पूरी दिल्ली के अस्पतालों के लिए पीपीई किट खरीदारी की जिम्मेदारी थी। डा. विशाल ने किट को खराब गुणवत्ता के आधार पर खारिज कर दिया। साथ ही डीजीएचएस की निदेशक डॉ. नूतन को पत्र लिखकर केंद्र के मानकों के अनुसार ही किट लेने की सिफारिश की। लेकिन पीपीई किट पास नहीं करने से नाराज डीजीएसएच निदेशक ने डॉक्टर विशाल का ट्रांसफर राजीव गांधी कोविड वार्ड में कर दिया। इसके बाद डॉ. नूतन और सेन्ट्रल प्रेक्योरमेंट विभाग में तैनात डॉ. सुनील ए फ्रांसिस के साथ मिलकर सभी पीपीई किट पास कर दी। डीजीएसएच निदेशालय ने दोबारा पीपीई किट की खरीदारी के लिए टेंडर जारी किया। इसमें 42 कंपनियों ने भाग लिया। 4 कंपनियां लोकल थीं और कोई भी कंपनी केंद्र के मानकों को पूरा नहीं कर रही थी। इस बार जो कमेटी बनाई गई उसके प्रमुख डीजीएसएच के सीनियर एडिशनल डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेस डा. अरुण बनर्जी थे। उन्होंने भी मानक वाली पीपीई किट लेने का सुझाव दिया।
केंद्र के मानकों के अनुसार ऐसी होनी चाहिए पीपीई किट: पीपीई ऐसी हो जिससे शरीर का तापमान सही बना रहे। कपड़ा और सिलाई वाटर एवं एयर प्रूफ हो। कपड़ा ऐसा हो जिसमें थूक, पानी की तेज धार पीपीई को पार नहीं करे। किट पर निर्माण करने वाली कंपनी, कंपनी का लाइसेंस नंबर, निर्माण की तारीख, बैच नंबर, एक्सपायरी डेट के साथ किट के स्टरलाइजेशन का तरीका भी दर्ज होना चाहिए।
^मैंने डॉक्टर विशाल धीर का ट्रांसफर नहीं किया, ट्रांसफर सचिवालय से होता है। मैंने कभी किसी डॉक्टर पर पीपीई किट का सैंपल पास करने के लिए दबाव नहीं डाला। पीपीई किट पहनकर मेरे डॉक्टर ही जाएंगे, मैं उनकी जान से खिलवाड़ नहीं कर सकती। मैं डीजीएचएस की निदेशक हूं, मेरा काम केवल उनसे काम लेना है। -डॉ. नूतन मुंडेजा, निदेशक, डीजीएचएस
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