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शब ए कद्र पर न मस्जिदें खुलीं, न कब्रिस्तानों में हुई फातिहा, पूरी रात घरों में इबादत

बरकतों का महीना रमजान अब खत्म होने काे है। बुधवार को 27वें रोजे की रात शब ए कद्र मनाई गई। लॉकडाउन के चलते शबे कद्र पर मुस्लिम समाज के लोगों ने पूरी रात अपने घर के भीतर रहकर ही इबादत की। फातिहा भी घरों में ही दिलाई गई। राजधानी के इतिहास में यह पहला मौका था जब शब ए कद्र पर शहरभर की मस्जिदें और कब्रिस्तान सूने रहे।
मुस्लिम समाज के अनुसार शबे ए कद्र पर खुदा ने अपने प्यारे नबी पर कुरआन नाजिल किया है। इस वजह से इस रात में इबादत करना अफजल माना जाता है। इस वजह से शबे कद्र पर मस्जिदों और कब्रिस्तानों में बंदों की भारी भीड़ उमड़ती है। इस बार लॉकडाउन ने बरसों से चली आ रही रमजान की इस रस्म को भी प्रभावित किया है। शहर काजी मौलाना मोहम्मद अली फारुकी ने पहले ही लोगों से अपील कर दी थी कि घरों में रहें। धार्मिक जगहों पर भीड़ न लगाएं। महामारी से बचने के लिए जितना ज्यादा हो सके, एहतियात बरतें। लोगों ने भी इस अपील पर अमल किया और पूरी रात घर के भीतर ही शब ए कद्र की इबादत की। शहरी काजी फारुकी बताते हैं कि रमजान शुरू होने के साथ ही मस्जिदों में तरावीह शुरू हो जाती है जो शब ए कद्र पर खत्म होती है। इस बार भी इमामों का सम्मान हुआ पर महज 5 लोगों की मौजूदगी में।
पिछले सात दिनों से मस्जिदों में एतकाफ के लिए बैठे हैं मोत्तफिक ईद का चांद देखने के बाद ही बाहर आएंगे, तब तक सिर्फ इबादत
मस्जिदों में मोत्तकिफ पिछले 7 दिनों से एतकाफ के लिए बैठे हैं। ईद का चांद दिखाई देने के बाद ही वे बाहर आएंगे। वैसे हर साल एतकाफ के लिए भी मस्जिदों में बड़ी संख्या में मोत्तकिफ बैठते थे, इस बार इनकी संख्या भी कम है। दरअसल, जेहनम से आजादी का अशरा शुरू होने के बाद कुछ लोग मस्जिद में चले जाते हैं, जो ईद का चांद दिखने के बाद ही बाहर आते हैं। इन्हें ही मोत्तकिफ कहा जाता है। एतकाफ एक कठिन इबादत है, जिसमें कोई एक दूसरे को देखता नहीं। किसी से बात नहीं करता। ईद तक वे केवल खुदा से ताल्लुक रखते हैं।
चांद की तस्दीक हुई तो रविवारनहीं तो सोमवार को मनाएंगे ईद
ईद किस दिन मनाई जाएगी, इसकी घोषणा चांद की तस्दीक होने के बाद होगी। मुस्लिम यतीम खाना के फकद नुरानी मियां ने बताया कि शनिवार को यदि चांद की तस्दीक हो जाती है तो रविवार, नहीं तो अगले दिन यानी सोमवार को ईद मनाई जाएगी। फितरा में 2 किलो 45 ग्राम गेहूं या इसकी रकम दी जाती है। फिलहाल बाजार में इसकी कीमत 75 रुपए है। यदि गेहूं देते हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि वही गेहूं दें जो आप खाते हैं। इसके अलावा ईद के लिए भी यही अपील है कि लॉकडाउन का पालन करते हुए घरों के अंदर रहते हुए मनाएं। मौजूदा परिस्थितियों में यही जरूरी है।
वक्फ बोर्ड की अपील- ईद की नमाजनहीं पढ़ सकते तो चाश्त की नमाज पढ़ें
ईद को लेकर वक्फ बोर्ड ने भी बुधवार को बैठक रखी थी। मस्जिदों के इमाम और मुतवल्ली इसमें शामिल हुए। वक्फ बोर्ड ने अपील की है कि जो लोग किसी कारण से ईद की नमाज नहीं पढ़ सकते वे चाश्त की नमाज पढ़ें। बोर्ड के अध्यक्ष सलाम रिजवी से इदुल फितर पर हुई चर्चा में मुफ्तियों ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान ईद की नमाज घर में नहीं पढ़ सकते। नमाजे ईद वाजिब होने की शर्त ये है कि इस बीच किसी तरह की रुकावट न हो। इसीलिए जो ईद की नमाज नहीं पढ़ सकते उन्हें शरीअत के मुताबिक चाश्त की नमाज पढ़नी चाहिए। वक्फ बोर्ड ने लोगों से ऐसा ही करने की अपील की है।



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लॉकडाउन 4.0 में कुछ छूट मिलने के बाद सेवइयों और ड्राय फ्रूट्स की दुकानें खुल गई हैं। हालांकि, पहले के मुकाबले कम लोग ही खरीदी के लिए पहुंच रहे हैं। मौजूदा परिस्थियों को देखते हुए इस बार सेवइयां घरों में ही तैयार की जा रहीं हैं।


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