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शिक्षाविदों का सुझाव: जान बचाना जरूरी सिर्फ फाइनल ईयर स्टूडेंट्स की लें परीक्षा

कोरोना संक्रमण के बाद कॉलेजों में एग्जाम लेना है या नहीं इस पर सरकार को निर्णय लेना है, उच्च शिक्षा विभाग ने अपर संचालक और कुलपतियों की एक कमेटी बनाई थी। कमेटी ने अंतिम निर्णय का फैसला सरकार के ऊपर छोड़ा था। अगर परीक्षा हुई तो परीक्षार्थियों को मास्क पहनना जरूरी होगा। इसके साथ एक कक्षा में अब 40 की जगह 20 परीक्षार्थी ही बैठ पाने की बात कही गई थी। उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों के अनुसार इस प्रस्ताव सरकार के पास भेजा गया है।
शिक्षाविदों का कहना है कि अगले 15 दिन के बाद एग्जाम लिया जाए अभी जो हालात है उसमें कोरोना संक्रमण का खतरा है। ऐसे हालात में तुरंत एग्जाम लेना ठीक नहीं होगा। रिटायर्ड प्रोफेसर अंबिका वर्मा ने बताया कि फर्स्ट ईयर, सेकंड ईयर का जनरल प्रमोशन करने के साथ फाइनल ईयर के एग्जाम होने चाहिए, परिस्थितियां अभी ऐसी ही हैं। हर विश्वविद्यालयों में पूरा एग्जाम लेना बचा हुआ है, यदि अभी एग्जाम होता है तो अगस्त सितंबर में एडमिशन प्रक्रिया शुरू होगी। हायर एजुकेशन के रिटायर्ड प्रिंसिपल डॉ. जवाहर चौबे कोरोना संकट में अभी एग्जाम लेना थोड़ा कठिन है, अभी 15 दिनों को थोड़ा रूकना चाहिए इसके बाद ही इस पर फैसला लिया जाना चाहिए। अभी जो हालात हैं, उसमें कोरोना के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। अभी शैक्षणिक सत्र अव्यवस्थित हुआ है लेकिन आने वाले वर्षों में यह ठीक हो जाएगा लेकिन स्टूडेंट्स की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।
लॉकडाउन के पहले से स्कूल भी बंद हैं
राज्य में स्कूलों को 1 जुलाई से खोलने की तैयारी की चर्चा थी हालांकि फैसला नहीं हुआ है। शिक्षा विभाग अगर 1 जुलाई से स्कूल खोलता है तो स्कूलों में बने क्वारेंटाइन सेंटर पंचायत के दूसरे भवनों में शिफ्ट करने होंगे। गुरुवार को कलेक्टर भीम सिंह ने भी अफसरों की बैठक ली।

अब अंतिम निर्णय सरकार को लेना है
"एग्जाम लेने को लेकर हमने एक कमेटी बनाई थी, जिसमें निर्णय लेना के बाद उसे हम राज्य सरकार को भेज दिया है। उसे सरकार को फैसला लेना हैं कि एग्जाम लिया जाए या नहीं। उम्मीद है इसमें जल्दी फैसला हो जाएगा।''
-शारदा वर्मा, डायरेक्टर, उच्च शिक्षा विभाग



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