किसानों से जुड़े संगठनों के आह्वान पर छत्तीसगढ़ किसान सभा ने शनिवार को किसान सम्मान दिवस मनाया। इस दौरान लॉकडाउन की गाइड लाइन का पालन किया गया। किसानों ने अपने-अपने घर के सामने संबंधित मांगों की तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया।किसान सभा के संयोजक नंदलाल कंवर कहा कि सरकार किसानों, मजदूरों को राहत देने के बदले सिर्फ कर्ज दे रही है। जिस कर्ज को बाद में उन्हें अदा करना पड़ेगा। जो किसान पहले से ही कर्ज में डूबा है उसे और कर्ज देकर सरकार क्या साबित करना चाहती है। किसान की लाॅकडाउन में आर्थिक स्थिति और भी खराब हो गई है। प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार की कमी, सीमांत व्यापार, छोटे किसान कृषि के अलावा मजदूरी कर भी अपनी आजीविका का निर्वहन करते हैं। अब इस बंदी ने उनसे रोजगार भी छीन लिया है। गांवों से अन्य राज्य में रोजगार के लिए पलायन कर जाने वाले मजदूर की भी गांवों में वापसी हो रही है जिनके पास अब कोई भी रोजगार नहीं बचा है। किसान सभा ने प्रदर्शन के जरिए सरकारों से मांग की है कि किसान, गरीब मजदूर परिवारों को प्रति माह 7500 रुपए उनके बैंक खाते में जमा किया जाए। किसानों के कर्ज व टैक्स माफ किए जाएं, ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार सृजन किया जाए, मनरेगा के तहत सभी जरूरतमंद परिवारों को रोजगार दिया जाए, मनरेगा के मजदूरी दर में वृद्धि की जाए, शहरी क्षेत्र में भी मनरेगा प्रारंभ किया जाए, किसानों के फसलों का उचित दाम निर्धारित किया जाए। प्रदर्शन करने वालों में माकपा के सचिव प्रशांत झा, किसान सभा के जवाहर सिंह कंवर, दिलहरण बिंझवार, शिवरतन उपस्थित थे।
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