मध्य प्रदेश के रास्ते हजारों की संख्या में टिडि्डयों के दल ने भरतपुर विकासखंड के चिडौल, जवारीटोला में धावा बोला है। ग्रामीणों ने सुबह आधा वर्ग किमी एरिया में हजारों की संख्या में टिडि्डयों के झुंड को उड़ता देखा है।
टिड्डियों के पहुंचने की जानकारी लगते ही किसान अपनी सब्जियों की फसल को बचाने की जुगत में लगे हैं। खेतों में किसान पैरासाइट दवा छिड़काव सहित अन्य बचाव के उपाय अपनाकर इन्हें खदेड़ रहे हैं। मौसम की मार के बाद कीटों की आफत से जिले के किसानों की परेशानी बढ़ गई है। शनिवार शाम से भरतपुर के जवारीटोला में हजारों की संख्या में टिडि्डयों ने डेरा जमाया हुआ है। कृषि वैज्ञानिक बता रहें है कि जवारीटोला के आसपास करीब 20 हजार टिडि्डयां पहुंच चुकी हैं। जिले में टिड्डियों के दल के आने की सूचना पर रविवार सुबह कलेक्टर सत्य प्रकाश राठौर प्रशासनिक अमला के साथ भरतपुर के प्रभावित गांव में पहुंचे। यहां पहले से ही किसान और स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड पर थे।
सुबह ग्रामीणों ने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर खेतों में पैरासाइट का छिड़काव शुरू कर दिया है, इससे सैकड़ों टिड्डियां मार दी गई हैं। दोपहर बाद बैकुंठपुर और मनेंद्रगढ़ से फायर ब्रिगेड की दो गाड़ी बुलवाकर कीटनाशक का छिड़काव कर साल के पेड़ पर डेरा जमाए टिडि्डयों को भगाने का प्रयास किया गया। कृषि विभाग के अफसर शीघ्र ही टिडि्डयों पर नियंत्रण पाने की उम्मीदें जता रहें हैं। कृषि विज्ञान केंद्र सलका, कृषि विभाग और वन विभाग की टीम टिडि्डयों की लोकेशन और मूवमेंट पता लगाने के लिए टेंट लगाकर गांव में रुकी है।
इधर दवा छिड़काव के साथ ही टिडि्डयों का दल डोंगरीटोला, माड़ीसरई, बेला, देवगढ़ में फैल गया है। बताया जा रहा है कि मप्र कोरिया सीमा पर टिडि्डयां 20 किमी के दायरे में फैली हुईं हैं। केवीके के कृषि वैज्ञानिक विजय कुमार ने बताया कि हवा की दिशा में टिडि्डयां अपना रूख करतीं हैं। रविवार को हवा नहीं चलने से इनका मूवमेंट नहीं मालूम चल सका है। तकरीबन 20 हजार टिडि्डयों का यह दल नजर आ रहा है। टिड्डी दल का बड़ा समूह अब भी मप्र सीमा में हैं।
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