नक्सलियों के लिए कोयलीबेड़ा इलाके में सक्रिय रूप से कार्य करने वाले भाजपा मंडल के पूर्व महामंत्री अरुण ठाकुर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वह नक्सलियों के लिए ठेकेदारों से लेवी भी वसूलता था। साथ ही ठेकेदारों से मिले सामानों को नक्सलियों तक पहुंचाता था। नक्सलियों को सामान पहुंचाने के मामले में पहले पकड़े गए शहरी नक्सली सहयोगियों से हुई
पूछताछ में सभी ने अरूण कुमार ठाकुर को नक्सलियों का प्रमुख शहरी सहयोगी बताया। जिसके बाद पुलिस ने जांच पड़ताल कर उसे गिरफ्तार किया। उसने अपना गुनाह भी कबूल कर लिया। विदित हो कि अरुण पिछले साल ही कोयलीबेड़ा भाजपा मंडल के महामंत्री पद व भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। कोयलीबेड़ा इलाके में नक्सलियों का शहरी नेटवर्क अरुण ठाकुर के माध्यम से खड़ा किया गया था।
पुलिस ने सिकसोड़ थानांतर्गत 24 मार्च को नक्सलियों को सामान पहुंचाते ठेकेदार तापस पालिक को पकड़ा था। इसके बाद जांच करते करते कोयलीबेड़ा निवासी अरूण कुमार ठाकुर तक पहुंची। जांच पड़ताल में यह बात सामने आई कि अरूण कुमार पिछले कई सालों से नक्सलियों के संपर्क में था। लेकिन कुछ सालों से वह इलाके में काम कर रहे ठेकेदारों से नक्सलियों के लिए वसूली करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। नक्सलियों से मिली सामानों की पर्ची को ठेकेदार तक पहुंचा उसकी खरीदी करवाता था। किसी कार्य के लिए ठेकेदार व नक्सलियों के बीच मध्यस्थता करता था।
इलाके के सभी कामों की सेटिंग इसी के माध्यम से होती थी। उसका नाम पिछले कुछ सालों से नक्सलियों से जुड़ रहा था। पुलिस उस पर नजर थी। लेकिन पुख्ता सबूत नहीं मिलने के कारण उसे नहीं पकड़ा था। अब पुख्ता सबूत मिलने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार नक्सली मददगार अरुण ठाकुर ठेकेदारों से मिले सामान कपड़, जूते, राशन, दवा, बिजली के तार, रोजमर्रा के सामान, पटाखे व बैनर पोस्टर के कपड़ों को अपने कोयलीबेड़ा स्थित घर पर डंप करता था। जिसे मौका मिलने पर अपने स्कार्पियो वाहन से नक्सलियों तक पहुंचाता था।
सभी आरोपियों के खंगाले जा रहे रिकार्ड : एएसपी कीर्तन राठौर ने बताया मामले में जांच जारी है। पकड़े गए सभी लोगों से गहन पूछताछ की जा रही है। पकड़ा गया आरोपी अरुण कुमार लंबे समय से नक्सलियों के लिए काम कर रहा था। सभी के रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं।
कभी अरुण के खिलाफ नक्सलियों ने फेंके थे पर्चे
ठेकेदारों से लेवी वसूलने के बाद कुछ रकम अरुण ने दबा दिया था। इसलिए नक्सलियों ने उसके खिलाफ पर्चे फेंकने लगे थे। एेसे पर्चे बोंदानार इलाके में पाए गए थे। बाद में किसी तरह नक्सलियों से अपनी गलती की मांफी मांग रकम अदा कर समझौता किया था। इसके बाद फिर से वह नक्सलियों के लिए काम करने लगा था। 2018 में अरुण कुमार ठेकेदार तापस पालित के साथ मिलकर कागबरस से गुड़ाबेड़ा सड़क का निर्माण करा रहा था।
मामले में अब तक 11 गिरफ्तार कमांडर की तलाश जारी
मामले में अब तक कुल 11 आरोपी ठेकेदार तापस पालिक 24 मार्च, मुंशी दयाशंकर मिश्रा 29 मार्च, अजय जैन, कोमल प्रसाद वर्मा राजनांदगांव, रोहित नाग कोयलीबेड़ा, सुशील शर्मा उत्तर प्रदेश, सुरेश शरणागत मध्यप्रदेश 24 अप्रैल, टोनी उर्फ शीलेंद्र भदौरिया राजनांदगांव 5 मई, जनपद सदस्य राजेंद्र सलाम व एरिया कमेटी के सप्लाई टीम सदस्य मुकेश सलाम 6 मई तथा प्रमुख सहयोगी अरूण ठाकुर को 12 मई को गिरफ्तार किया गया है।
फोटोकॉपी से पाम्पलेट निकालने का संदेह
कोयलीबेड़ा इलाके में अधिकांश बार प्रिंटेड पर्चे फेंके जाते थे। अरुण कुमार की स्टेशनरी के साथ फोटो कापी का भी काम था। पुलिस को शक है कि अरुण अपने प्रिंटर, फोटो कॉपी मशीन व कम्युटर से नक्सलियों के पर्चे निकाल कर उसे फेंकवाता भी रहा होगा।
नक्सलियों के दम पर ले रहा था ठेका : अरूण कुमार नक्सलियों के आश्रय पर ही अंदरूनी व अति संवेदनशील इलाके के काम को ठेकेदारों के साथ मिलकर करता था। इलाके में तालाब व अन्य निर्माण का भी ठेका लेता था। इसके लिए उसने जेसीबी व अन्य संसाधन भी जुटाए थे। जिसमें कुछ को वह बैंक फायनेंस से खरीदा था।
15 साल पहले था उपसरपंच : अरूण कुमार शुरू से भाजपा व आरएसएस से जुड़ा था। इलाके के युवाओं को आरएसएस के प्रशिक्षण में भेजने पर भी नक्सली उससे नाराज थे। जिससे वह युवाओं को ट्रेनिंग में भेजना बंद कर दिया था। 15 साल पहले कोयलीबेड़ा में वार्ड पंच का चुनाव जीत उपसरपंच चुना गया था।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2YYhKlm
via
Comments
Post a Comment