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ग्रामीणों ने पहाड़ी के झरने से गांव तक पानी लाने एक किमी लंबी नाली बनाई, पाइप के सहारे अब घरों तक पहुंच रहा पानी

बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ ब्लाॅक के आमगांव के आश्रित बीजडीह गांव के 50 परिवारों ने पहाड़ से पेयजल गांव तक पहुंचाने के लिए एक किलोमीटर लंबी कच्ची नाली का निर्माण किया है।
उसके बाद आधा किलोमीटर तक पाइप बिछाकर पानी मोहल्ले तक लाया गया है। बड़ी बात तो यह है कि पहाड़ी पर स्थित इस गांव तक पहुंचने के लिए रोड नहीं है। इसके कारण यहां लोग पैदल ही पहुंच पाते हैं। शंकरगढ़ से 15 किलोमीटर दूर आमगांव ग्राम पंचायत से लगे पहाड़ी में टोंगरीपारा है। जहां तक पेयजल पहुंचना आसान नहीं था। इस पर ग्रामीणों ने पहाड़ी में देखा कि अच्छा जलस्रोत है, जहां से पूरे साल पानी निकलता है और पहाड़ में ही बहता रहता है। इसके बाद उस पानी को टोंगरी पारा तक लाने के लिए पांच साल पहले गांव के लोगों ने कच्ची नाली का निर्माण शुरू किया। नाली बनाने से जब पानी गांव पहुंच गया तो पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग बीच बीच में सीमेंट और ईंट से पानी की टंकी बनाई गईं, जहां पानी एकत्र होकर आगे बहता है। यहां जब पानी गांव में पहुंचने वाला होता है। उससे कुछ दूर तक पाइप बिछा दिया गया है ताकि साफ पानी और पीने योग्य मिल सके। इन दिनों यहां ग्रामीण टंकियों को साफ कर रहे हैं।

बरसात के दिनों में सबसे बड़ी समस्या
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में उन्हें सबसे बड़ी समस्या होती है। रोड नहीं होने के कारण एम्बुलेंस तो दूर बाइक भी नहीं पहुंच पाती है। इसके कारण किसी के बीमार या गर्भवती को अस्पताल ले जाना कठिन हो जाता है।

प्लानिंग के अभाव में पी रहे हैं गन्दा पानी
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से लोग नाली से बहकर आने वाला गंदा पानी पी रहे हैं। जबकि पहाड़ में फिल्टर यूनिट लगाकर पाइप-लाइन से पीने के लिए गांव में पानी मुहैया कराया जा सकता है।

यहां से कोई शादी तक नहीं करना चाहता

ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल का संकट के साथ यहां जब किसी की शादी होती है तो दूल्हे को आधा किलोमीटर पैदल चलकर दुल्हन के घर आना पड़ता है। वहीं जब यहां कोई दुल्हन आती है तो उसे भी पैदल ही चलना पड़ता है।

बरसात से पहले करा दी जाएगी मरम्मत

पूर्व जनपद सदस्य अमिताभ सिंह देव ने बताया कि पेयजल की समस्या को देखते हुए नाली और पाइप से लोगों ने मेहनत कर पानी गांव तक पहुंचाया। पाइप पंचायत और जनपद के पैसे से लगाया गया है। इसका बरसात से पहले मरम्मत कराया जा रहा है।

गांव तक नहीं पहुंचती है बोरवेल मशीन

एसडीओ पीएचई सीएल कोरी ने बताया कि डोंगरी पारा में बोरवेल मशीन नहीं जा पाती है। इसके कारण यहां मनरेगा या पंचायत मद से जल स्रोत को कुंआ के रूप में बनाकर सुरक्षित किया जा सकता है। वहीं ब्लीच पाउडर डालकर बरसात में पानी को पीने योग्य बनाया जा सकता है। कुसमी ब्लाॅक में 10 पंचायतों में पहाड़ी पर बसे गांवों में जल स्रोत में पक्का कुंआ बनाकर सुरक्षित किया गया है।



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The villagers made a one-km long drain to bring water from the waterfall of the hill to the village, now water is reaching the houses with the help of pipes


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