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लॉकडाउन में भी सखी सेंटर सक्रिय, परिवारों को बचा रहे

जिले के सखी वन स्टॉप सेंटर कोरोना वायरस जैसी आपदा के बीच भी लोगों को राहत पहुंचाने का काम कर रही है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए न सिर्फ इस संकट की स्थिति में ऑफिस खुला हुआ है, बल्कि महिलाओं को संरक्षण व आश्रय भी यहां मिल रहा है। सखी वन स्टाप सेंटर की केंद्र प्रशासक माधुरी यादव ने बताया कि लॉकडाउन की स्थिति में अब तक करीब 6 से ज्यादा परिवारों को टूटने से बचाया गया है तो वहीं करीब तीन लोगों के रिश्ते मजबूत करने में सफलता मिली है।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी वन स्टाप सेंटर द्वारा 24 घंटे सातों दिन महिलाओं को एक ही छत के नीचे निशुल्क परामर्श, चिकित्सा, विधिक सहायता दी जा रही है। इसके अलावा लॉकडाउन के समय सखी वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को न्याय दिलाने में काफी मददगार साबित हो रहा है। साथ ही कई दंपतियों की गृहस्थी को टूटने से बचाने में भी इस केन्द्र को अच्छी सफलता मिल रही है। इसके अलावा केंद्र में आने वाली महिलाओं और युवतियों को हैंडवाश और मास्क के फायदे बताते हुए उन्हें मास्क
दिया जा रहा है।
626 में से 531 प्रकरण का हो चुका है निपटारा: सखी वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं को सलाह, सहायता, संरक्षण और छत मिल जाती है। सखी वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा, दैहिक शोषण, बाल यौन शोषण, दहेज प्रताड़ना, व्यक्तिगत विवाद, छेड़छाड़, लापता महिलाओं की तलाश जैसी समस्याओं के अब तक 626 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इसमें से अब तक 531 का निपटारा हो चुका है। सेंटर में अब तक 215 महिलाओं को आश्रय दिया गया है। सखी सेंटर में शिकायत करने वाली पीडि़ताओं को एफआईआर, चिकित्सा, लीगल परामर्श की सुविधा दी जा रही है। केंद्र की प्रशासक ने बताया कि बस्तर जिले में सखी सेंटर की स्थापना 10 मार्च 2017 को हुई थी। महिलाओं को इस सेंटर में भरपूर मदद मिल जाती है। सेंटर में 11 महिलाओं का स्टॉफ कार्यरत है। यहां स्टॉफ में सभी महिलाएं हैं। शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता है।

केस 1- जाति के बंधन को तुड़वाया

लॉकडाउन के चलते एक प्रेमी जोड़े अलग-अलग जातियों के चलते शादी नहीं कर पा रहे थे। लड़के वाले इस शादी के लिए तैयार नहीं थे। इसे लेकर युवक और युवती दोनों परेशान थे। जैसे ही इसकी जानकारी सखी वन स्टाप सेंटर के कर्मचारियों को मिली उन्होंने दोनों परिवारों को बुलाया और शादी के लिए तैयार किया। केंद्र की प्रशासक माधुरी यादव ने बताया कि बार- बार समझाइश देने के बाद जब लड़के के परिजन तैयार नहीं हुए तो उन्हें युवक और युवती के बालिग होने की जानकारी दी गई और कहा गया ये अपनी मर्जी से शादी कर सकते हैं। इसके बाद लड़के के परिजन तैयार हुए।
केस 2- मां को मिला उसका बच्चा
जगदलपुर ब्लाॅक मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर एक गांव में लॉकडाउन के बीच एक महिला के बच्चे को उसका पति जबरन उससे छीनकर अपने पास लाया था। इसकी जानकारी महिला ने सखी वन स्टाप सेंटर में दी, लेकिन गाड़ियां बंद होने से महिला केंद्र तक नहीं आ पा रही थी। इसके बाद सेंटर के कर्मचारियों ने 112 वाहन को महिला के घर भेजा और वहां से उसे सेंटर में लाया गया। इसके बाद महिला के पति से फोन पर बात की गई, उसे समझाया गया अाैर कानूनी पहलू बताते बच्चे काे उसकी मां को साैंपने कहा गया। कुछ समय बाद ही शहर से करीब 8 किमी दूर पर रह रहा बच्चे का पिता सेंटर में पहुंचा और बच्चे को उसकी मां को सौंपा।



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