रायपुर स्टेशन से गुजरने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के मजदूरों के खाने में सेंधमारी की जा रही है। श्रमिक ट्रेनों में बांटे जाने वाले भोजन, नाश्ते के पैकेट व पानी बोतल में कटौती करने का खुलासा हुआ है। इस घपले की जानकारी तब मिली जब अचानक रेलवे के कुछ अधिकारियों ने खाने पैकेट के बंडल की गिनती की। एक कोच में यात्रियों की संख्या के हिसाब से प्रति बंडल 67-68 पैकेट हाेना जरूरी हैै। लेकिन गिनती करने पर इसमें 57-58 ही पैकेट पाया गया। एक ट्रेन में 22 से 24 कोच होते हैं, ऐसे में प्रति ट्रेन 1500 से अधिक खाने के पैकेट को बांटना चाहिए। लेकिन ट्रेनों में दो सौ से भी अधिक खाने के पैकेट में कटौती की गई। भोजन पैकेट की गिनती सोमवार की देर रात हुई, जिसके बाद इंडियन रेलवे कैटरिंग एण्ड टूरिज्म कार्पोरेशन आईआरसीटीसी के साथ ही रेलवे के भी कई अधिकारी जांच के घेरे में आ गए हैं। आईआरसीटीसी के तीन कामर्शियल इंस्पेक्टरों की जांच शुरू हो गई है। वहीं, मंडल प्रशासन ने इसके लिए पूरी तरह आईआरसीटीसी को ही जिम्मेदार ठहराया है। क्योंकि रेलवे बोर्ड ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में खाना-पानी सप्लाई करने का पूरा ठेका कार्पोरेशन को ही दिया है।
नाश्ता पैकेट से केला-केक गायब
रेलवे बोर्ड के निर्देश के मुताबिक जिन स्टेशनों से श्रमिक स्पेशल ट्रेन गुजरेगी, संबंधित रेल मंडल को खाने-नाश्ते व पानी का इंतजाम करना है। ट्रेन के शिड्यूल तय होने के साथ ही सभी रेल मंडलों व जोन में इसका फॉरमेट पहुंच जाता है। ट्रेन की टाइमिंग के हिसाब से नाश्ता व खाना पैकेट देने का निर्देश है। रायपुर स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेनों में सफर करने वाले मजदूरों के नाश्ते पैकेट में तय मात्रा व संख्या के हिसाब से खाद्य वस्तुएं नहीं दी गई। जांच के बाद यह पता चला कि दो की जगह एक ही केला पैकेट में दिया गया। इसी तरह एक केक भी देने का निर्देश है, जो सभी पैकेट से गायब मिला।
दो की जगह एक ही पानी बोतल
श्रमिकों को नाश्ते-खाने के साथ 1 लीटर वाली दो-दो बोतल पानी देने का प्रावधान है। लेकिन यहां एक ही बोतल पानी देकर ट्रेन को रवाना किया जा रहा है। ऐसे में सैकड़ों बोतल पानी को बचाकर बड़े स्तर पर घोटाला किया गया है। चूंकि गर्मी से ट्रेन तपने लगी है, इसलिए अब स्टेशन में अलग से पानी देने की व्यवस्था की गई है। पानी की किल्लत की वजह से ही रायपुर स्टेशन में पाइप के द्वारा ट्रेन में बैठे यात्रियों की बोतलें भरी जा रही है।
25 ट्रेनों में 30 हजार भोजन पैकेट देने का दावा :
रायपुर स्टेशन में 5 मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों को खाना-पानी दिया जा रहा है। 19 मई तक करीब 25 ट्रेनें यहां से गुजर चुकी हैं। रेलवे प्रशासन ने दावा किया है कि इन ट्रेनों में 30 हजार से अधिक भोजन व नाश्ते का पैकेट बांटा गया है। आईआरसीटीसी के आंकड़े के मुताबिक एक ट्रेन में औसतन 1400 पैकेट श्रमिकों को बांटा गया है, लेकिन खुलासे के बाद यह आंकड़ा भी बनावटी व फर्जी लग रहा है।
इस तरह समझिए इस घपले को :
श्रमिक ट्रेनों में खाना-पानी देने की जिम्मेदारी भले ही आईआरसीटीसी की है, लेकिन इसके खर्चे को रेलवे वहन कर रही है। खाना देने वाले सर्विस प्रोवाइडर को प्रति पैकेट 50 रुपए का भुगतान किया जा रहा है। एक ट्रेन में करीब 222 पैकेट कम दिए गए। ऐसे में यदि 25 ट्रेनों का हिसाब लगाएं तो 5 हजार 550 भोजन पैकेट की कटौती हुई और इससे लगभग 3 लाख रुपए का चूना रेलवे को अभी तक लग चुका है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि यह केवल रायपुर स्टेशन में पैकेट बांटने में घपले की जानकारी है। पूरे जोन के बड़े स्टेशनों में श्रमिकों को भोजन-पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
"श्रमिक ट्रेनों में खाना-पानी देने की प्राथमिक जिम्मेदारी आईआरसीटीसी की है। कुछ ट्रेनों में खाने-नाश्ते व पानी बोतल की कम सप्लाई का मामला सामने आया हैै। इस संबंध में संज्ञान लेते हुए आईआरसीटीसी के अफसरों को हिदायत दी गई है और जांच के निर्देश दिए गए हैं।"
-श्याम सुंदर गुप्ता, डीआरएम, रायपुर रेल मंडल
"ट्रेनों में खाने के पैकेट को गिनने और उसके संख्या को सुनिश्चित करने के लिए वहां रेलवे के अफसर की सहमति भी होती है। आईआरसीटीसी के जिन कॉमर्शियल इंस्पेक्टरों ने यह काम किया है, उसपर कड़ी कार्रवाई होगी। इस संबंध में पूरी जानकारी जुटाने का काम चल रहा है।"
-राजेेंद्र बोरबन, ग्रुप जनरल मैनेजर, आईआरसीटीसी
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