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प्रदूषण की मार झेल रहे दलपतसागर में कंटीले जलीय पौधे भी दिखे

कई तरह के जलीय पौधों और जलकुंभियों के चलते धीरे-धीरे उथले होते जा रहे दलपतसागर में अब एक और कंटीले जलीय पौधे की उपस्थिति देखी गई है। जो आने वाले दिनों में खतरा हो सकता है। यह कंटीला पौधा मछुआरों के जाल में फंस जाता है। यह कटीला और भंगुर पौधा है जो विश्व के लगभग सभी भागों में फैला हुआ है। यह समुद्र और स्वच्छ जल दोनों में पाया जाता है।
जीव विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील दत्ता ने हाल ही में इसे दलपतसागर में उस समय देखा जब वे जलीय पक्षियों की खोज में वहां पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि यह पौधा काफी तेजी से पानी में फैलता है। इसका वैज्ञानिक नाम नाजास मरीना है। लगभग 50 सेमी लंबा यह कंटीला और भंगुर पौधा है, जिसकी पत्तियों के किनारे पर भी आरी के समान नुकीली संरचनाएं निकली होती हैं। तने में भी कांटा पाया जाता है। यह एकलिंगी पौधा है। गर्मियों में इसमें फूल आते हैं लेकिन पौधे में निषेचन पानी की सतह के नीचे ही होता है। हवाई द्वीप समूह में कभी इसे भोजन के लिए उगाया जाता था। यह पौधा तिलापिया सहित अन्य बड़ी मछलियों के लिए भोजन है। लेकिन इस वर्ष बरसात में मछली के बीज नहीं छोड़े जा सके थे। यदि ग्रासकॉर्प मछली के बीज अधिक संख्या में छोड़े जाएं तो संभवतः वे इसका भक्षण कर सकते हैं।
पूरे जलाशय में फैला हुए हैं ये पौधे
मछुआरे भगत और विजय निषाद ने बताया कि यह पौधा दलपतसागर में ठंड के मौसम से ही दिख रहा है। पहले यह कम था लेकिन अब यह दलपतसागर के शिव मंदिर से लेकर आइलैंड तक और मछली पालन विभाग के तालाबों से लेकर बालाजी मंदिर के आगे हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी तक किनारे की तरफ फैल चुका है। मछुआरों ने बताया कि इससे सबसे बड़ी दिक्कत मछली पकड़ने में आती है, क्योंकि जाल डालने पर यह जलीय पौधा उसमें फंस जाता है, और निकालते समय हाथ में चुभता है वहीं जाल भी फट रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक जल में नाइट्रोजन और फास्फोरस युक्त प्रदूषण प्रचुर मात्रा में है जो ऐसे जलीय पौधों के फलने फूलने में सहायक होते हैं।
गरियाबंद और रायपुर में भी देखा गया: वनस्पति विज्ञान विशेषज्ञ और पर्यावरणविद डॉ. एमएल नायक ने बताया कि इस पौधे को उन्होंने गरियाबंद के जंगल में बहने वाले नदी और रायपुर के एक तालाब में भी देखा है। यह काफी तेजी से फैलता है, इस पर नियंत्रण जरूरी है।



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Thorny aquatic plants are also seen in Dalpatasagar facing pollution


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