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मैरीगोल्ड प्रोजेक्ट का निकल गया दम, बीज भी नहीं मिल रहे

कृषि विभाग ने 2018 में किसानों को गैंदा फूल की खेती करने प्रोत्साहित करने मैरीगोल्ड प्रोजेक्ट चलाया। इस दौरान किसानों को गैंदा फूल के बीज देकर इसकी तकनीकी जानकारी भी दी। सालभर योजना चला इसके बाद विभाग ही इससे पीछे हट गया। दो सालों से किसानों को बीज ही उपलब्ध नहीं करा जा रहा है।
कृषि विभाग ने 2018 में मैरीगोल्ड प्रोजेक्ट योजना के अंतर्गत 16 गांव के 120 किसानों ने नवंबर माह में अपनी बाड़ी व खेतों में गैंदा फूल लगाया था। किसानों ने सिर्फ एक बार ही पौधा लगाया। अभी एक भी एकड़ खेत में गेंदा का फूल नहीं लगा है। बाजार में सही मूल्य नही मिलने और बीज नहीं मिलने की वजह से इस सत्र में गेंदा फूल लगाने के लिए किसानों ने रूचि नहीं ली। फिर योजना भी बंद हो गया। 2018 में जब शासन ने मैरीगोल्ड प्रोजेक्ट की स्कीम शुरू की थी। किसानों को गेंदा फूल का बीज के साथ दवाई व खाद वितरित किया गया था। साथ ही अन्य सामान भी प्रदान किया गया था। इसमें महिला कृषकों को भी प्राथमिकता दी गई थी। किसानों को कृषि विभाग ने गैंदा फूल की खेती करने का प्रशिक्षण भी लिया था। इसके बाद किसानों ने 10 डिसिमल से लेकर 25 डिसिमल तक अपने कृषि भूमि या बाड़ी में गेंदा फूल लगाया था, लेकिन 2019 में अभी कोई किसान गेंदा फूल की खेती ही नहीं कर रहा है।
लाॅकडाउन में बाहर से फूल नहीं पहुंच रहा
लाॅकडाउन की अवधि में एक माह से ज्यादा समय से शहर के फूल दुकान बंद हैं। अब कुछ दिनों से छूट मिलने से दुकान खुली है, तो भी दुकान नहीं चल रहे हैं। क्योंकि लॉकडाउन की वजह से फूल बाहर से नहीं पहुंच रहे हैं। फूल व्यावसायी रवि गनवीर ने कहा यहां पर फूल की खेती काफी कम है। लॉकडाउन की वजह से दूसरे शहरों से भी फूल नहीं पहुंच रहा है। इससे फूल का व्यवसाय काफी मंदा है।
दूसरे साल ही योजना हो गई ठप
ग्राम दसपुर में 10 किसानों ने गेंदा फूल लगाया था। ग्राम दसपुर के किसान सरजु यादव ने कहा 25 डिसमिल में गैंदा का फूल लगाया था। वे फिर से दूसरी बार गैंदा का फूल लगाते, लेकिन उन्हें बीज ही नहीं मिल पाया। उन्होंने अभी गैंदा फूल की जगह पर सब्जी लगाई है। नंदकिशोर साहू ने कहा कि उन्होंने भी 25 डिसमिल में गैंदा का फूल लगाया था लेकिन उन्हें भी बीज नही मिल पाया। वरना वे फिर से गेंदा फूल लगाते। ग्राम गढ़पिछवाड़ी में 6 किसानों ने गेंदा का फूल लगाया था। गांव के तरेंद्र भंडारी ने कहा कि यहां फूल की ज्यादा मांग नहीं है।

दूसरे जिले की अपेक्षा यहां कम मिल रही कीमत : धमतरी की अपेक्षा यहां कम कीमत मिल रहा है। धमतरी में 50 रुपए गैंदा फूल की कीमत है तो कांकेर में गैंदा फूल की कीमत 15 से 25 रुपए है। इसके चलते किसानों नुकसान हो रहा है।
फिर से प्रयास किया जाएगा : कांकेर कृषि उपसंचालक नरेंद्र कुमार नागेश ने कहा कि गैंदा फूल लगाने के लिए किसानों को फिर से प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों को उचित दर पर गैंदा फूल की बिक्री हो इसके लिए प्रयास किया जाएगा।



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Marigold project lost power, seeds are not available


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