ओडिशा बॉर्डर के धनपुंजी बैरियर पर रैपिड टेस्ट किट से जांच में जिस ट्रक ड्राइवर को पॉजिटिव बताया गया था, उसे कोरोना नहीं है। मेकॉज में गुरुवार की देर रात हुए आरटी-पीसीआर (रिअल टाइम पॉलीमरेज चेन रिएक्शन) टेस्ट में इसकी पुष्टि हुई है। बस्तर में मंगलवार को रैपिड टेस्ट की करीब 8 सौ किट भेजी गई थी, गुरुवार को इससे जांच शुरू की गई थी। चीन की किट लौटाकर छग सरकार ने एसडी बायो सेंसर हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड हरियाणा से कोरिया की किट मंगाई गई है। पहले दिन 16 किट का उपयोग किया गया था, इनमें आंध्र निवासी ड्राइवर की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई थी। जबकि खलासी की रिपोर्ट निगेटिव थी।
इससे पहले सूरजपुर में मंगलवार को श्रमिक और सिपाही समेत 10 लोग रैपिड जांच में पॉजिटिव बताए गए थे। रायपुर में पीसीआर जांच में तीन को कोरोना होने की पुष्टि हुई है। रैपिड किट से जांच का बड़ा नुकसान यह है कि इससे पॉजिटिव नतीजे आने के बाद लोग घबराहट में आ जाते हैं। खासकर वह व्यक्ति जिसकी जांच होती है। असल में कोरोना ही नहीं, दूसरी बीमारियों के कारण भी रैपिड किट पॉजिटिव नतीजे दे सकती है।
नतीजों में अंतर इसलिए... कोरोना नहीं, रैपिड किट सिर्फ एंटीबॉडी की जांच करती है
रैपिड किट की जांच की सबसे खास बात यह है कि इससे किसी वायरस को उसके प्रकार से नहीं जांचा जा सकता है। ये किट सिर्फ इतना बताती है कि शरीर में वायरस का हमला वर्तमान हुआ है, या पहले हो चुका है। दरअसल शरीर पर जब कोई वायरस हमला करता है तो रक्त में मौजूद श्वेत रक्त कणिका यानी व्हाइट ब्लड सेल्स एंटीबॉडी बनाते हैं। सामान्य शब्दों में वायरस से लड़ने खून में कुछ कमांडो तैयार हो जाते हैं, जो शरीर को बचाते हैं। शरीर में वायरस का हमला हुआ है या नहीं, यह पता करने एंटीबॉडी टेस्ट होता है।
दो प्रकार की किट होती है : रैपिड किट भी दो तरह की होती है, आईजीजी और आईजीएम। आईजीएम किट से यह पता चलता है कि वायरस का हमला अभी भी हुआ है, जबकि आईजीजी किट से पता चलता है कि वायरस का हमला पुराना है। सामान्य शब्दों में शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र ने वायरस को बेअसर करने के लिए एंटीबॉडी बनाए हैं या नहीं इस किट से पता चलता है। किट में एंटीबॉडी के मिलते ही किट पॉजिटिव रिएक्शन देती है और इससे वायरस के हमले की पुष्टि हो जाती है पर यह पता नहीं चलता किस वायरस ने हमला किया है।
सामान्य फ्लू में भी पॉजिटिव नतीजे संभव
इस किट से जांच का नमूना रक्त, प्लाज्मा या सीरम हो सकता है। रैपिड किट में निर्धारित जगह पर सैंपल की तय मात्रा डाली जाती है। फिर एक केमिकल की तीन बूंदें डाली जाती हैं। करीब दस मिनट में परिणाम पता चल जाता है। लेकिन यह कोरोना की पुष्टि नहीं करता। सामान्य फ्लू, सर्दी खांसी, एचआईवी, सार्स, कॉलरा, इबोला, स्वाइन फ्लू, जेईई, हेपेटाइटिस आदि में भी यह किट पॉजिटिव परिणाम दे सकती है। बीमारी जानने एडवांस टेस्ट होते हैं।
स्क्रीनिंग के लिए बेहतर है रैपिड टेस्ट
"सभी संदिग्धों का पीसीआर टेस्ट संभव नहीं है, इसमें समय भी काफी लगता है। इसलिए रैपिड किट से हम स्क्रीनिंग कर लेते हैं। रैपिड किट से पॉजिटिव लोगों का पीसीआर टेस्ट होता है।"
-डॉ. अय्याज तंबोली, बस्तर कलेक्टर
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