लॉकडाउन-3 के 17 मई को खत्म हो जाएगा। 18 मई से लॉकडाउन-4 लागू होगा। ट्रेन और यात्रा के दूसरे साधन बंद हैं ऐसे में जिले के दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों का हाल बेहाल है। इनमें वे लोग भी है जो 15-20 सालों से दूसरे राज्यों में रह गए। अब वहां काम बंद हो गया, कोई सहारा नहीं है इसलिए परदेस में सब छोड़कर घर लौटना चाहते हैं। भास्कर ने जिले के उन मजदूरों से बात की जो अभी दूसरे राज्यों में फंसे हैं। दूसरे राज्यों में फंसे जिले के लोगों की संख्या कम है इसलिए ना तो उनकी वहां कोई सुनवाई है और ना ही वे खुद गाड़ी या कोई साधन लेकर लौटने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं।
बोरवेल में काम करने वाले आधा दर्जन कामगार कर्नाटक व तमिलनाडु में फंसे

रायगढ़ व बलौदाबाजार के श्रमिक कर्नाटक में फंसे हैं। ढाई महीने से काम नहीं मिलने पर जमा रुपए खर्च हो गए और अब दाने-दाने को मोहताज हैं। सारंगढ़ के उदय और शशि नाम के मजदूर बताते हैं कि कर्नाटक में काम बंद हुआ तो किसी ने काम दिलाने की बात की। उम्मीद मेंट्रक पर बैठकर तमिलनाडु पहुंच गए। वहां हालत खराब है इसलिए ये लोग छत्तीसगढ़ तो दूर कर्नाटक भी नहीं लौट सके। कर्नाटक में लेखराम, नीलकमल सहित आधा दर्जन श्रमिक फंसे हुए हैं।
अभी काम है लेकिन घर लौटना चाहते हैं हरियाणा में फंसे प्रदेश के 200 लोग

हरियाणा के सोनीपत में सैकड़ों ईंट भट्ठे और चिमनी भट्ठे हैं। रायगढ़ के 150-200 लोग यहां काम करते थे। इनमें से भट्ठे पर पथेरा का काम कर रहे भरत चौहान से भास्कर ने फोन पर बात की तो इन लोगों को भविष्य की चिंता है। उन्होंने बताया, साहब 4 महीने काम चलता है। 20-25 दिन और काम चलेगा पर लॉकडाउन नहीं खुलेगा तो घर कैसे जाएंगे। अब पत्नी को भी काम पर लगा दिया है ताकि कुछ पैसे और मिल जाएं। सहायता के लिए बताए गए नंबर पर फोन किया लेकिन किसी ने उठाया नहीं। हम यहां डरे हुए हैं।
पुसौर और सारंगढ़ के पांच परिवार के सदस्य गुजरात के सूरत में फंसे

गुजरात की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाला शहर सूरत बुरी तरह से कोरोना ग्रस्त है। घनी बस्ती वाले इलाकों में घरों की छत पर आना मना है। यहां फंसे सहनू चौहान ने कहा, मजदूरी करने आए थे यहां। पुसौर और सारंगढ़ के चार-पांच परिवार हैं। पहले एक इलाके में किराए की झोपड़ी में रहते थे। अब काम छूट गया है। रुपए खर्च ना हों इसलिए एक झोपड़ी में पांच-छह लोग रहते हैं। एक मजदूर ने कहा, पत्नी और दो बच्चों के साथ यहां फंसा हूं। अगर अकेला होता तो साइकिल से गांव लौट जाता लेकिन परिवार को ले जाना संभव नहीं है।
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