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लॉकडाउन की वजह से शहर में शुद्ध हवा लेकिन तालाब सफाई के नाम पर उसी का दम घोंट दिया निगम ने

राजधानी में पिछले दो महीने से सबसे अच्छी बात यही है कि खींचकर गहरी सांस लेने की आजादी है, क्योंकि रात ही नहीं बल्कि दिन में भी हवा बिलकुल साफ है। ऐसे माहौल में नगर निगम ने शहर के बड़े हिस्से में टनों धूल झोंक दी है। दरअसल निगम ने बूढ़ातालाब की सफाई का बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया है। तालाब से निकाली गई कीचड़ ट्रकों से लोड कर पुलिस लाइन गेट के सामने से टिकरापारा होते हुए सेजबहार तक ले जाई जा रही है। गीला कीचड़ ट्रकों से गिरकर सड़कों पर फैला है और दोपहर की गर्मी में सूखकर इस तरह उड़ने लगा है कि पिछले तीन दिन से हजारों लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। धूल इतनी ज्यादा है कि इन सड़कों के आसपास घनी बस्तियों में घरों तक घुस रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह तालाब के कीचड़ से निकली यह धूल स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह है। पिछले तीन दशक में शहर के प्राचीन बूढ़ातालाब को साफ करने के लिए नगर निगम और अन्य सरकारी एजेंसियों ने दर्जनों प्रोजेक्ट बनाए। काम भी हुए, लेकिन हर बार काम सिर्फ पैसे खर्च करने का बहाना मात्र रहा। तालाब का एक हिस्सा जलकुंभी और मिट्‌टी में दबकर पूरी तरह खत्म हो चुका है। 19 मार्च से शुरू लॉकडाउन के बाद शहर में व्यावसायिक गतिविधियां थम गई हैं। वाहन भी नहीं चल रहे हैं। इस से शहर में पीएम-2.5 और पीएम-10 की मात्रा 50 से भी नीचे चली गई है। हवा 40 फीसदी तक साफ हो गई है। लेकिन पिछले दो दिन से बूढ़ातालाब से निकाले जा रहे मलबे और कचरे के कारण बूढ़ातालाब से पुलिस लाइन गेट, नरैया तालाब होते हुए संतोषी नगर की पूरी सड़क खराब हो गई है।
"तालाब की सफाई जरूरी थी, लेकिन सड़कों पर धूल की समस्या तो है। सड़कें साफ करवाएंगे ताकि ऐसा न हो।"
- पुलक भट्टाचार्य, अपर आयुक्त निगम रायपुर
रोजगार जरूरी, बदइंतजामी क्यों?
कोरोना संकट के समय में लोगों को रोजगार दिलाना बड़ी प्राथमिकता है। तालाब की सफाई इसीलिए हो रही है, लेकिन लोगों की सेहत भी बड़ी जरूरत है। एेसे समय में इस काम की बदइंतजामी से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने का खतरा है। अर्थशास्त्र के जानकारों का कहना है कि मौजूदा हालात में निगम सहित अन्य सरकारी एजेंसियों को लोगों के पुनर्वास और संकट को कम करने वाले काम करने चाहिए। ये ऐसे न हों कि शहर की मुसीबत बढ़ा दी जाए।
जलकुंभी भी अभी हटाएंगे
तालाब से मिट्टी और जलकुंभी निकालने का काम निगम कर रहा है। इसके बाद तालाब में कैमिकल का छिड़काव किया जाएगा। यह काम स्मार्ट सिटी करेगी। बताया जा रहा है कि इस काम के लिए निगम ने कुछ प्राइवेट लोगों से संपर्क किया है। उन्हें ही यह काम देने की तैयारी है, ताकि लोगों को रोजगार मिले।



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बूढ़ातालाब से कीचड़ का ऐसा परिवहन, नेहरूनगर से सेजबहार तक दमघोंटू धूल


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