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राशन वितरण में अनियमितता की पार्षदों ने मुख्यमंत्री से की शिकायत

नगर निगम के पार्षदों ने मुख्यमंत्री और खाद्य मंत्री को पत्र भेजकर राशन वितरण में अनियमितता का आरोप लगाया है। पार्षदों ने मुख्यमंत्री से राशन वितरण पारदर्शी ढंग से कराए जाने की मांग की है। पार्षद आलोक दुबे ने खाद्य मंत्री अमरजीत भगत को पत्र लिखकर बताया कि केंद्र और प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयास से राशन योजना के तहत सरगुजा जिले में राशन वितरण किया जा रहा है। इसमें खाद्य विभाग की लापरवाही और राशन दुकानों के सेल्समैन की मिलीभगत से इसमें अनियमितता बरती जा रही है। इससे उपभोक्ताओं में भ्रम व आक्रोश की स्थिति है। उन्होंने बताया कि इसके लिए राशन दुकानों पर कितना राशन दिया जाना है, इसकी सूची लगाई जाए ताकि भ्रम न हो। इसके अलावा यह भी बताया जाए कि किस योजना के तहत चावल दिया जा रहा है। पत्र में बताया कि अप्रैल, मई और जून महीने का चावल एक साथ खाद्य विभाग दे रहा है। जबकि इनको अप्रैल का चावल उसी महीने में देना था। इसके अलावा जो चने का वितरण किया जा रहा है वह केंद्रीय योजना का है न कि राज्य का। इसके अलावा अंत्योदय राशन कार्ड के राशन वितरण में भी चार सदस्यों वाले परिवार को किसी को 50 किग्रा तो किसी को 95 किग्रा चावल दिया जा रहा है। इससे भ्रम की स्थिति बन रही है। उन्होंने पूरे मामले की जांच के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्त करने की मांग की है।
इसी प्रकार पार्षद मधुसूदन प्रसाद शुक्ला ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को पत्र भेजा। इसमें बताया कि प्रदेश सरकार जनता को राहत देने के लिए तीन किग्रा प्रति सदस्य के हिसाब से अतिरिक्त चावल दिया जाना है। इसके तहत पांच सदस्यों वाले कार्ड वालों को तो यह सुविधा दी जा रही है, जबकि चार सदस्यों वाले परिवारों को सिर्फ पांच किग्रा चावल ही दिया जा रहा है। इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से प्रदान किए गए चने को भी जनता में समान रूप से नहीं बांटा जा रहा है। उन्होंने राशन वितरण में हो रही अनियमितता रोकने की मांग की है।



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