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धर्म प्रचारक पर आपत्तिजनक लेख भड़के साधु-संतों ने किया प्रदर्शन

संत कवि व महिमा धर्म के प्रचारक भीम भोई पर कथित आपत्तिजनक लेख प्रकाशित कराने वाले केदार मिश्र के खिलाफ महासमुंद जिले के बसना में क्षेत्र में विख्यात आलेख महिमा आश्रम बसना, दुरुगपाली समेत अनेक ग्रामों के साधुओं ने लॉकडाउन का पालन करते हुए आश्रम से ही विरोध दर्ज किया है। साथ ही कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।


आलेख महिमा आश्रम के बाबा निरंजन दास ने बताया कि महिमा धर्म के प्रचारक कवि भीम भोई ओडिशा के गौरव माने जाते हैं। संत कवि के आदर्श व मर्यादा का लोग सम्मान करते हैं। महिमा धर्म का प्रचार-प्रसार करने वाले संत कवि के प्रति लोगों की आस्था जुड़ी है। बाबा ने बताया कि कवि भीम जन्म से ही दिव्यांग (दृष्टिहीन) होने के बावजूद उन्होंने अपनी साधना से दिव्य ज्ञान की प्राप्ति की थी। ओडिशा समेत विभिन्न राज्यों में इसको मानने वाले हैं तथा उनका आश्रम भी है।


साधुओं ने बताया कि केदार मिश्र ने भीम भोई जैसे संत पर झूठे आरोप लगाने के इस प्रयास की आलेख महिमा आश्रम ने घोर निंदा की है। ऐसा दुस्साहस करने वाले तथाकथित लेखक केदार मिश्र के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। विरोध प्रदर्शन में बाबा निरंजन दास आलेख महिमा आश्रम बसना, साधु मदनमोहन दास महिमा आश्रम दुरुगपाली, साधु योगेंद्र दास, प्रफुल्ल त्यागी, साधु सत्यागी व सतपति समेत अनेक आश्रम के साधुओं ने अपने आश्रमों में विरोध दर्ज किया गया।

जानिए क्यों हो रहा विरोध
प्रदर्शन कर रहे साधुओं ने कहा कि लेखक केदार मिश्र ने अपनी पुस्तक में कई आपत्तिजनक बातों का उल्लेख किया है। युवा अवस्था में युवती की हत्या भी किए जाने का जिक्र भी पुस्तक में है। साधुओं ने कहा कि यह असत्य होने के साथ उनकी छवि को कलंकित करने का प्रयास है। लोग इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। संत कवि ने लिखा था कि ‘मेरा जीवन भले ही नर्क में पड़ा रहे पर जगत का उद्धार हो’ पंक्ति को आज भी लोग स्मरण करते हैं। ऐसे महान संत कवि पर आपत्तिजनक लेख प्रकाशित कराने पर ओडिशा ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ वासियों की भावना को इससे ठेस पहुंची है।



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बसना. सोशल डिस्टेंसिंग के साथ प्रदर्शन करते हुए साधु


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