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क्वारेंटाइन सेंटर्स में अच्छा खाना और वाईफाई दें वरना मुश्किल, लॉकडाउन बढ़ाने से अब कोई फायदा नहीं होगा: डॉ. शेट्‌टी

(पवन कुमार)मशहूर कार्डियक सर्जन और नारायणा हेल्थ के चेयरमैन डॉ. देवि शेट्टी का कहना है कि देश में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूराें के राज्यों में लौटने पर उनकी जांच और दो सप्ताह तक क्वारेंटाइन में रखने के दौरान यह ध्यान रखना होगा कि उन्हें रहने की जगह और खान-पान अच्छा मिले। साथ ही अनलिमिटेड वाईफाई कनेक्शन भी। ऐसा नहीं हुआ तो लोग दो-तीन दिन में ही सेंटर छोड़ने लगेंगे। इनमें से यदि एक भी संक्रमित हुआ और बाहर निकला तो स्थिति खतरनाक हो सकती है। पूर्व में दिल्ली से हम सबक ले चुके हैं। हजार लोगों के कारण देश में मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। उनसे बातचीत के मुख्य अंश...
लॉकडाउन का कितना फायदा है, क्या इसे आगे और बढ़ाने की जरूरत है?
अब हर जगह लॉकडाउन बढ़ाने से मेडिकली बहुत फायदा नहीं है। भारत बड़ा देश है। यूरोप की तरह यहां भी पॉलिसी बनाने की जरूरत है। सभी जगह की समस्या अलग-अलग तरह की हैं। मसलन हर राज्य को अपनी स्थिति के अनुसार पॉलिसी तय करनी चाहिए और फैसले का अधिकार जिला प्रशासन को देना चाहिए।
भारत ने बहुत पहले लॉकडाउन का निर्णय ले लिया था, इससे कितना फायदा हुआ?
भारत का अप्रोच बहुत अच्छा रहा। ऐसा नहीं होता तो आज मृतकों की संख्या दोगुनी से ज्यादा होती और मरीज भी कई गुना बढ़ जाते। जितने मरीज 6 माह में आएंगे, उतने दो हफ्ते में आ जाते फिर उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता। अमेरिका-इटली में यही हुआ।
लॉकडाउन या इसके बाद सोशल डिस्टेसिंग का सही तरीके से पालन नहीं हुआ तो क्या होगा?
सोशल डिस्टेसिंग में लापरवाही बरती गई तो भारत की स्थिति भी इटली जैसी हो सकती है, जहां एक-एक दिन में हजारों की संख्या में मरीज आएंगे और मृतकों की संख्या भी उसी तरह से बढ़ेगी। बड़े-बड़े देशों में वेंटिलेटर, पीपीई किट, डॉक्टर्स और दवाइयों की कमी पड़ गई।
हर्ड इम्यूनिटी कब तक विकसित हो जाएगी?
हर्ड इम्यूनिटी विकसित होने के लिए कम से कम 50% लोगों को इस वायरस से संक्रमित होना होगा। कम से कम दो-तीन साल लगेंगे।
ज्यादा जांच करने से क्या फायदा होगा?
ज्यादा जांच से यह होगा कि संक्रमितों की पहचान करके उन्हें क्वारेंटाइन किया जा सकता है। बिना लक्षण वाले मरीज को अलग नहीं किया गया तो ये अपने घरों में ही बुजुर्गों को संक्रमित कर देंगे। हालांकि अभी भी पर्याप्त जांच नहीं हो रही है क्योंकि पूरे विश्व में आरटी-पीसीआर जांच में इस्तेमाल होने वाली री-एजेंट की कमी है।

अब हर वक्त मास्क, 6 फुट दूरी की आदत डालें, बुजुर्ग घर से बाहर न निकलें, पब्लिक ट्रांसपोर्ट कम इस्तेमाल करें
- भीड़भाड़ वाली जगह पर नहीं जाना है। हर वक्त मास्क लगा कर रखना है। एक-दूसरे कम से कम छह फुट की दूरी रखना है। किसी को टच नहीं करना है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट का कम से कम इस्तेमाल करना और उसमें भीड़ बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। घर से बाहर तभी निकलें जब जाना बेहद जरूरी हो। घर के बुजुर्ग या जो बीमार हैं उन्हें बिल्कुल बाहर नहीं जाने दें और उनकी जरूरतों को घर के वयस्क पूरा करें।



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Give good food and wifi in quarantine centers or else difficult, increasing lockdown will no longer benefit: Dr. Shetty


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