प्रदेश पंचायत सचिव संघ ने ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात पंचायत सचिवों को नियमित शासकीय सेवक घोषित करने की मांग राज्य सरकार से की है। संघ के प्रदेश प्रवक्ता यशवंत आडिल ने कहा कि सचिव लॉकडाउन में भी कार्य कर रहे। कई साथी दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं। कोरोना की चपेट में भी आने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ में केस मिल चुके हैं। जब जमीनी स्तर पर काम करना होता है तो सरकार, जनप्रतिनिधि और प्रशासन को सचिव की भूमिका याद रहती है। लेकिन उनके शासकीयकरण और वेतनमान की बात आती है तो केवल आश्वासन देकर टाल दिया जाता है। वास्तव में कोरोना की असली जंग अभी गांवों में शुरू होनी है। प्रदेश से बाहर काम करने गए हजारों मजदूरों और इन शहरी ग्रामीणों की वापसी हो रही है। जिसे सुव्यवस्थित नियंत्रण की अहम जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सचिव की है। इसके बाद भी सरकार ने पंचायत सचिवों को 50 लाख बीमा और अन्य सुविधाओं की श्रेणी में नहीं रखा है। वेतनमान बढ़ोतरी व नियमितिकरण की मांग को लेकर हल्ला बोलने की तैयारी में सचिव संघ लॉकडाउन के बाद वादा निभाओ रैली में ताकत दिखाएगा। दुर्ग जिलाध्यक्ष महेंद्र साहू ने कहा कि सबसे पहले सचिवों का शासकीयकरण, दो वर्ष परिवीक्षा अवधि के बाद सचिवों को बढा हुआ वेतनमान दिया जाए।
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