शहर में कई लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं, लेकिन उनका अब तक उनका बीपीएल राशन कार्ड नहीं बन पाया है। ऐसे लोग कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन में बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। पहले शासन द्वारा बिना राशन कार्ड के लोगों को भी राशन दिया गया, लेकिन अब यह व्यवस्था भी बंद हो गई है। ऐसी स्थिति में उनके लिए संकट खड़ा हो गया है। शांति नगर वार्ड की सुभद्रा कोड़ोपी (56) का राशन कार्ड नहीं है। इससे जीविका यापन करने में काफी तकलीफ हो रही है। सुुभद्रा कोड़ोपी का 5 वर्ष पहले राशन कार्ड था, लेकिन कार्ड को सर्वे टीम ने मकान को देखकर निरस्त कर दिया। उसके घर में कोई कमाने वाला नहीं है। उनके पति की 8 साल पहले मौत हो चुकी है। वह शारीरिक रूप से भी कमजोर है। वह कहती है कि यदि उसके पास राशन कार्ड तो कम से कम खाने का इंतजाम तो हो जाता है।
कांकेर सहायक खाद अधिकारी टीआर ठाकुर ने कहा कि पात्रता होने पर लोगों का गरीबी रेखा का राशन कार्ड जरूर बनेगा। अभी राशन कार्ड बनने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए आवेदन भी शहर व गांव से आ रहे हैं। कार्ड का समय पर नवीनीकरण कराना जरूरी है, वरना कार्ड निरस्त हो जाता है।
बेटों से भी कोई सहयोग नहीं
एमजी वार्ड की सुरजा पटेल (65) अकेली किराए के घर में रहती है। उसके दो बेटे हंै, जो धमतरी में रहकर मजदूरी करते हैं। उसका भी राशन कार्ड नहीं बना है। उसे निराश्रित पेंशन भी नहीं मिल रही है। वह होटल में काम करती थी, जो अब अब बंद है। राशन कार्ड नहीं होने से लॉकडाउन के दौरान काफी दिक्कत हो रही है। उनके बेटे भी उसे पैसे नहीं देते। एमजी वार्ड की मीना विश्वकर्मा भी अकेली रहती है और मजदूरी कर जीविका यापन कर रही है। राशन कार्ड नहीं बन पाया है और न ही निराश्रित पेंशन मिल रही है। उन्होंने कहा कि वह कई बार नगरपालिका में जाकर राशन कार्ड बनाने का प्रयास कर चुकी है, लेकिन नहीं बन पाया। ऐसी ही स्थिति भंडारीपारा वार्ड की सोमारी बाई का भी है। सोमारी होटल मेंं काम करती है, लेकिन वह बंद है। दिक्कत हो रही है। आरती मरकाम, राजबाई का भी राशन कार्ड नहीं होने राशन नहीं मिल पा रहा है।
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