नगर निगम में कामकाज को लेकर नए पुराने पार्षदों और अफसरों के बीच तालमेल ठीक नहीं है। इसे लेकर कांग्रेस अध्यक्ष ने एक के बाद एक सोमवार को सभी पार्षदों से चर्चा की। निगम के अफसरों पर मनमानी और नजरअंदाज करने की बात कही, आखिर तक चर्चा में अध्यक्ष किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सके।
कांग्रेस अपने पार्षदों को एकजुट होकर निगम क्षेत्र को और बेहतर बनाने का संकल्प लिया है, लेकिन नए पुराने पार्षद और अफसरों के बीच बेहतर तालमेल नहीं होने कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है। अधिकांश नए पार्षद उनके वार्डों में कार्य स्वीकृत नहीं होने और वरिष्ठ पार्षदों व अफसरों का सहयोग उन्हें नहीं मिलने से मनमुटाव की स्थिति भी बन रही है। इसे गंभीरता लेते हुए अध्यक्ष अनिल शुक्ला ने सभी पार्षदों को एकजुट करने के उद्देश्य से जिला कांग्रेस भवन बुलाया था। यहां उन्होंने अपने चेंबर में दो-दो पार्षदों से चर्चा की। नाम नहीं लिखने की शर्त पर पार्षदों ने बताया कि सभी पार्षदों ने अपनी-अपनी समस्या बताई। एमआईसी सदस्यों ने चेंबर नहीं बनाने, अफसरों द्वारा फाइल आगे नहीं बढ़ाने की शिकायत की। तो कुछ पार्षदों ने तो बैठक में अध्यक्ष से निगम के अफसरों को हटवाने तक का सुझाव दिया।
शौकी बूटान और लक्ष्मीन मिरी नहीं पहुंचे कार्यालय
कांग्रेस के 26 पार्षदों में सिर्फ पार्षद ही सोमवार को कार्यालय नहीं पहुंचे। इनमें से एक शौकी बूटान और लक्ष्मीन मिरी शामिल हैं। जबकि इनके अलावा शेष सभी 24 पार्षद कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अध्यक्ष के पास अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
कार्यों की प्रगति को लेकर चर्चा
"बैठक का एक मात्र उद्देश्य शहर सरकार के कार्यों की प्रगति और उन्हें हो रही दिक्कतों पर चर्चा करना था। सदस्यों ने किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया है। उन्होंने काम के दौरान जरूर थोड़ी परेशानी की बात कही है। कुछ एमआईसी सदस्यों ने चेंबर व्यवस्था आदि की बात कही है।''
-अनिल शुक्ला, अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी
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