मेडिकल काॅलेज अस्पताल में ट्यूमर के ऑपरेशन के बाद डिस्चार्ज हुई पंडो जनजाति की महिला को मांगने के बाद भी घर जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिली। जबकि यहां 108 के अलावा अस्पताल की 7 एंबुलेंस हैं। बता दें कि सूरजपुर जिले के ग्राम दुर्गापुर निवासी मरीज नीलम पंडो के पति समयलाल ने 29 मई की शाम को प्राइवेट वाहन 900 रुपए में बुक कराया। उनके पास इतने ही पैसे थे।
नीलम को लेकर वह वाहन में बैठा तो ड्राइवर ने उन लोगों को घर पहुंचाने के बदले करीब 35 किमी पहले उदयपुर से लगे मृगाडांड के पास यह कहकर उतार दिया कि इतने पैसे में वह यहीं तक पहुंचा सकता है। जबकि नीलम की हालत इतनी खराब थी कि उसे एक कदम तक चलना मुश्किल हो रहा था। इसके चलते उन्होंने किसी तरह पास के एक ग्रामीण के यहां रात गुजारी फिर सुबह सड़क में आकर वाहन का इंतजार करने लगे। उनकी हालत देखकर कुछ ग्रामीणों ने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव तक इसकी जानकारी दी।
इसके बाद सिंहदेव के निर्देश पर स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया। उदयपुर से एक एंबुलेंस गई और नीलम व उसके परिजनों को घर तक पहुंचाया। बता दें कि कोरवा व पंडो जनजाति के लोगों को अस्पताल में निशुल्क इलाज के साथ उन्हें घर पहुंचाने की सुविधा मिलती है।
ट्यूमर का अस्पताल में हुआ ऑपरेशन
को पेट में दर्द की शिकायत रहती थी। परिजन उसे 16 मई को लेकर मेडिकल काॅलेज अस्पताल पहुंचे थे। यहां चेकअप के बाद पता चला कि उसके पेट में ट्यूमर है। डाॅक्टरों ने उसका ऑपरेशन कर दिया। घाव सूखने के बाद अस्पताल से उसे 29 मई को डिस्चार्ज कर दिया गया। नीलम के पति के अनुसार उसने घर जाने के लिए एंबुलेंस की मांग की, लेकिन नहीं मिली।
अस्पताल में उपलब्ध हैं 7 एंबुलेंस
मेडिकल काॅलेज अस्पताल में 108 की तीन एंबुलेंस के अलावा खुद की 7 एंबुलेंस हैं। इसमें दो एंबुलेंस कुछ महीने पहले ही शासन से मिली हैं। जबकि बाकी की अलग-अलग योजना से मिली हैं जो कुछ पुरानी हैं। इतनी अधिक संख्या में एंबुलेंस होने के बाद भी यदि जरूरतमंद को वाहन नहीं मिल रहा तो यह सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है।
पंडो जनजाति के लिए किराए पर भी भेज सकते हैं एंबुलेंस
अस्पताल की व्यवस्था के अनुसार कोरवा व पंडो जनजाति के अलावा दूसरे वर्ग के मरीज जरूरत पड़ने पर किराए पर एंबुलेंस ले सकते हैं। किराया भी लगभग डीजल के खर्च के बराबर ही है। इसके बाद भी यहां से किसी को एंबुलेंस लेते नहीं देखा गया है। बताया जाता है कि यहां प्राइवेट एंबुलेंस व वाहन वालों की घुसपैठ है। ये अंदर तक अपनी पैठ बनाए रहते हैं मरीज से संपर्क कर उनसे बुकिंग लेते हैं।
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