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अंतर्राज्यीय बस अड्‌डा बन गया टाटीबंध चौक, चेहरे पर दर्द और आंखों में घर पहुंचने की उम्मीदें लिए यहीं पहुंच रहे प्रवासी मजदूर

टाटीबंध चौक... शाम 5 बजे। करीब तीन सौ से ज्यादा मजदूरों का मजमा लगा है। कोई अपने गांव जाने वाली बस के रजिस्ट्रेशन के लिए घूम रहा है तो कोई चप्पल बंटने वाले स्टॉल को तलाश रहा है। कई श्रमिक भोजन के पैकेट लेकर आ रहे हैं तो कुछ पैकेट के लिए भटक रहे हैं। यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल जाने के लिए 800-800 किलोमीटर तक का लंबा सफर तय कर राेज सैकड़ों प्रवासी मजदूर टाटीबंध चौक केवल इसलिए पहुंच रहे हैं क्योंकि पैदल चलते-चलते रास्ते में उन्हें किसी ने बता दिया कि टाटीबंध चले जाओ वहां घर जाने वाली बस खड़ी है। एक मजदूर ग्रुप से दूसरे मजदूरों तक और इस तरह सैकड़ों लोगों तक ये मैसेज इतनी तेजी से फैल रहा है कि कहीं के भी श्रमिक घर जाने के लिए यहीं पहुंच जा रहे हैं।
टाटीबंध चौराहे तक पहुंचने के लिए महाराष्ट्र से राजनांदगांव होकर आने वाले मजदूरों को बार्डर पर बसों और ट्रकों पर लिफ्ट मिल जा रही है। जगदलपुर की ओर से आने वाले श्रमिक तो पैदल ही पहुंच जा रहे हैं। पिछले 10 दिनों से टाटीबंध चौक अंतर्राज्जीय बस अड्‌डा बना हुआ है। तीन दिन पहले तक तो 5-5 हजार प्रवासी श्रमिक यहां पहुंच रहे थे। अब धीरे-धीरे संख्या में कमी आ रही है। आने वाले प्रवासी मजदूरों में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग गांव में जाने वाले कम यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल-ओडिशा के ज्यादा हैं।
जांच के लिए हेल्थ स्टॉल लग गए
मंगलवार से टाटीबंध चौक पर हेल्थ डिपार्टमेंट के दो स्टॉल लगा दिए गए हैं। एक स्टॉल में आने-जाने वाले हर मजदूर की कोरोना के लक्षण की जांच की जा रही है। उनके लिए सेनिटाइजर स्टैंड और टनल भी लगाया गया है, तो दूसरे स्टॉल में सामान्य बीमारी और चोट का इलाज किया जा रहा है। शाम 4 बजे झारखंड के एक बुजुर्ग स्टॉल में इलाज कराने आए। उनकी पीठ पर बड़ा घाव था। डॉक्टरों ने मरहम पट्‌टी के बाद उन्हें दवाई दी। उसी समय महिला बुखार पीड़ित बच्चे को लेकर पहुंची। प्रशासन ने सफाई पर विशेष तौर पर फोकस किया हैं। सड़क किनारे और खाली मैदान में पंडाल लगा दिया गया है ताकि वहां गाड़ी के इंतजार में ठहर सकें।
ट्रक-ट्रेलर में मजदूरों बैठाने से परहेज : प्रशासन ने खुले ट्रक और टेलर में मंगलवार से मजदूर बैठाने से परहेज किया है। लंबी दूरी के मजदूरों को इसमें नहीं बिठाया जा रहा है। उन्हें बसों में बिठाकर भेजा जा रहा है। उनके लिए अलग से गाड़ियों की व्यवस्था की जा रही हैं।
यूपी-बिहार, बंगाल जाने के लिए सीधी बस नहीं
यूपी-बिहार और पश्चिम बंगाल के लिए सीधी बस नहीं है। इसके बावजूद श्रमिकों को घर तक पहुंचाया जा रहा है। टाटीबंध से बस में बिठाकर उन्हें बिलासपुर पहुंचाया जा रहा है। बिलासपुर में उन्हें अंबिकापुर भेजने के लिए बसें तैयार रखी जा रही है। वहां से उन्हें अंबिकापुर भेजा जा रहा है। अंबिकापुर से यूपी की बार्डर पहुंचाने का इंतजाम भी कर दिया गया है।



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टाटीबंध चौराहे पर हमेशा नजर आती है वाहनों की कतारें पर इस बार ये प्रवासी मजदूरों के लिए।


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