प्रतापपुर इलाके के धरमपुर में शनिवार रात बहरादेव हाथी ने एक मकान गिरा दिया। इससे मलबे में दबकर मां-बेटी घायल हो गईं। वहीं हाथी के आने की सूचना वन अमले के नहीं देने पर लोगों ने रेंजर के सामने रात में हंगामा किया।
ग्रामीणों का कहना था कि लोकेशन के लिए हाथी के लगाया गया कॉलर आईडी है। इसके बाद भी उन्हें हाथी के गांव में पहुंचने की जानकारी नहीं दी गई। धरमपुर पुरानी बस्ती में रात में करमेन गोड व बेटी पिंकी के साथ सो रही थी। इसी दौरान हाथी ने मकान की दीवार गिरा दी, जिससे दोनों मलबे में दब गईं। जब तक पहुंचे ग्रामीणों ने हाथी को खदेड़कर उन्हें बाहर निकाला और मां बेटी को अम्बिकापुर अस्पताल भेजा गया।
वहीं वन विभाग के कर्मचारियों के हाथी की मौजूदगी के दौरान गांव में नहीं पहुंचने पर ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। सुबह 4 बजे रेंजर व स्टॉफ गांव पहुंचा। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी रात 9 बजे गणेशपुर से निकला जो धरमपुर क्षेत्र की ओर गया।
गुस्साए ग्रामीणों ने रेंजर को खरी-खोटी सुनाई
रेंजर पीसी मिश्रा से ग्रामीणों ने कहा कि धरमपुर में आखिर किस काम के लिए वनकर्मी ड्यूटी करते हैं। हाथी के कॉलर आईडी लगाया गया है, इससे लोकेशन पता चलता रहे। इसके बाद भी क्यों सूचना नहीं दी गई। लोगों ने मांग की है कि धरमपुर में गजराज वाहन लोगों की सहायता के लिए रखा जाए। उन्होंने खड़गांव व प्रतापपुर में अनावश्यक खड़े वाहन को धरमपुर सर्किल में रखने कहा गया।
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