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नए कलेक्टर के सामने कोरोना की जांच करना सबसे बड़ी चुनौती: अंकित आनंद

कोरोना के संभावित खतरे के बीच मंगलवार को दुर्ग कलेक्टर अंकित आनंद का ट्रांसफर हो गया। मार्कफेड के जीएम के साथ नए रायपुर के सीईओ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह आईएएस डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे को दुर्ग का कलेक्टर बनाया गया है। वे वर्तमान में मुंगेली के कलेक्टर है और दो दिन बाद वे दुर्ग कलेक्टर की जिम्मेदारी संभालेंगे। दैनिक भास्कर ने दोनों से उनके अनुभवों व चुनौतियों को लेकर बात की। इस पर आनंद ने कहा कि बतौर कलेक्टर इस समय पर कोरोना के संक्रमण को रोकना बड़ी चुनौती है। वहीं दुर्ग के नए कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे से बात की, उन्होंने कहा कि ज्वाइनिंग के बाद ही वे इस पूरे विषय पर बात कर पाएंगे, लेकिन वे हर चुनौती के लिए पहले से तैयार हैं। पूरी टीम के साथ पुराने कलेक्टर द्वारा किए गए कार्यों के अनुभवों के आधार पर वे आगे की रणनीति बनाएंगे।
कोरोना का संक्रमण न हो, इसके लिए क्या कुछ किया अंकित आनंद ने
1 बाहर से आने वालों को ट्रेस किया, जांच कराई..: क्रमिक लॉकडाउन के दौरान जो भी लोग बाहर से दुर्ग आए। उन सबको प्राथमिकता के आधार पर ट्रेस कराया। सबकी स्क्रीनिंग की गई और इस दौरान जो भी संदेहास्पद मिले उनकी रैपिड किट और ट्रू-नॉट से जांच कराई। रिपोर्ट आने तक क्वारेंटाइन में रखा गया।
2 होम क्वारेंटाइन में रहने वालों की निगरानी कराई..: 25 मार्च को जिले में पहला एक्टिव मरीज मिलने के बाद ही बाहर से आने वालों की संख्त निगरानी की जाने लगी। इसके लिए निगम स्तर पर टीम बनाई गई और जो लोग होम आइसोलेशन में हैं, उन पर नजर रखी गई। इनमें कुछ की रैंडमली जांच भी कराई।
3 आवश्यक चिकित्तसा सेवाओं को मोबिलाइज कराया..: कोरोना के भय से ज्यादातर निजी अस्पताल केस लेने से डरने लगे। ऐसे में उन्होंने जिला अस्पताल को प्रिपेयर कराया। वहां के डॉक्टरों और स्टॉफ को समझाइश देकर डिलिवरी और इमरजेंसी सर्जरी को करने को कहा। इससे इलाज को लेकर अशांति नहीं होने पाई।
4 सोशल डिस्टेंसिंग के लिए समयानुरसा नियम सख्त किए..: कोरोना रोकथाम का एक मात्र उपाया सोशल डिस्टेंसिंग को प्राथमिकता दी। इसके लिए उन्होंने बजारों के लिए कभी नियम सख्त किए तो कभी ढील भी दी। बैकों, अस्पतालों और आवागमन के पास व्यवस्था को लागू किया। निगरानी के लिए निगम को लगाया।
नए कलेक्टर के लिए ये हैं बड़ी चुनौतियां

  • बाहर से आने वालों की ट्रैवलिंग के आधार पर जांच कराना, उन्हें 14 से 28 दिनों तक क्वारेंटाइन रखना।
  • जब तक रिपोर्ट न आए, तब तक हर संदिग्ध की मॉनिटरिंग और नियमित रूप से टेस्ट कराया जाना।
  • इलाज की सभी आकस्मिक सेवाओं को बाधित न होने देना, इसके लिए हर जरूरी इंतजाम करना।
  • सार्वजनिक स्थानों पर लॉकडाउन व सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना, बाजारों व अन्य सार्वजनिक जगहों पर जुटी भीड़ को नियंत्रण में रखना।


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