केरता स्थित मां महामाया शक्कर कारखाने में 10 मई को हुए हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई। परिजन शव लेकर रायपुर के अस्पताल से गांव पहुंचे।
जहां मृतक के परिजन ने मुआवजा की मांग नहीं मिलने तक शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। इसके बाद मिल अफसरों से 50 हजार की सहायता मिलने के बाद अंतिम संस्कार किया गया। बता दे कि शक्कर कारखाने में हुए हादसे में घायल ग्राम केरता निवासी मजदूर 23 वर्षीय संजय की नाजुक हालत को देखते हुए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल से रायपुर रेफर किया गया था। जहां पर इलाज के दौरान 15 मई को उसकी मौत हो गई। रात में ही उसका शव उसके गृहग्राम पहुंचा। सुबह परिजन ने मुआवजा की मांग को लेकर शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। इसके बाद में शक्कर कारखाने के चेयरमैन व जीएम पहुंचे। उनकी समझाइश व तात्कालिक सहायता राशि दिए जाने के बाद परिजन ने उसका अंतिम संस्कार किया। बता दें कि परिजनों का कहना था कि जब तक उन्हें क्षतिपूर्ति नहीं दी जाती, तब तक वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। कारखाना के चेयरमैन से भी बात करने पर परिजन अड़े थे। सूचना मिलते ही चेयरमैन विद्यासागर सिंह व प्रशासन की ओर से जीएम विजय सिंह उइके गांव पहुंचे। यहां उन्होंने मृतक के बड़े भाई को कारखाने में मजदूर की ही नौकरी और अंतिम संस्कार के लिए 50 हजार रुपए की तात्कालिक सहायता राशि प्रदान की। इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार करने शव ले गए।
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